स्वामी विवेकानंद की 161वीं जयंती के मौके पर गुरुवार को पूरे पश्चिम बंगाल में धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान रंगारंग रैलियां निकाली गईं और रामकृष्ण मिशन (आरकेएम) के विभिन्न केंद्रों पर प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इसके अलावा कोलकाता के शिमला स्ट्रीट में स्थित स्वामी विवेकानंद के पैतृक आवास पर बनी उनकी विशालकाय प्रतिमा पर भी श्रद्धांजलि देने वालों का तांता सारा दिन लगा रहा है। यहां बने म्यूजियम में भी लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर भी सत्ताधारी पार्टी तृणमूल और भाजपा के बीच तीखी जुबानी जंग जारी रही।
इसम मौके पर कई क्लबों और सामाजिक संगठनों ने बंगाल के विभिन्न हिस्सों में इस अवसर पर रैलियां निकालीं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। पुरुषों और महिलाओं ने पारंपरिक पोशाक पहनकर कोलकाता की सड़कों पर रंग-बिरंगी झांकी के साथ-साथ आध्यात्मिक प्रतिभा की तस्वीरें भी प्रदर्शित की।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फेसबुक पर स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि दी। उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के शिमला स्ट्रीट पहुंचे और स्वामी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। बनर्जी ने कहा कि वह आज के दिन राजनीति नहीं करना चाहते।
इससे पहले राज्य सरकार की ओर से मंत्री शशि पांजा ने स्वामी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला था। भाजपा की ओर से भी वरिष्ठ विधायक और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी तथा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने यहां पहुंचकर नेताजी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की है।
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने स्वामीजी के पैतृक घर की अपनी यात्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और विवेकानंद को आधुनिक भारत की आध्यात्मिक जागृति और दुनिया भर में सम्मानित एक ऐसे युवा प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद हैं, जो किसी भी कालखंड में प्रेरणा स्रोत बनेंगे। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "शिक्षा, राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता पर विवेकानंद की शिक्षा हमेशा प्रासंगिक रहेगी और भारत के युवाओं को प्रेरित करेगी।
इस अवसर पर शुभेंदु अधिकारी ने बाद में कहा कि तृणमूल द्वारा संचालित सरकार "युवाओं को सशक्त बनाने के स्वामी जी के दृष्टिकोण को पूरा करने में विफल रही है। बंगाल के युवाओं को नौकरी के लिए राज्य छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। उनके लिए रोजगार के कोई अवसर नहीं हैं। शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। यह वह बंगाल नहीं है जिसके बारे में स्वामी जी ने सपना देखा था।
उन्होंने कहा, 'हम इस तरह के मौके पर इतना नीचे नहीं गिरना चाहते और राजनीतिक कीचड़ उछालना नहीं चाहते। भाजपा ने हमारे रोजगार परिदृश्य के बारे में जो दावा किया है वह गलत है। यहां की स्थिति भाजपा शासित राज्यों से कहीं बेहतर है। सत्तारूढ़ तृणमूल ने विवेकानंद की शिक्षाओं को बनाए रखने और उनके आदर्शों का पालन करने का संकल्प लिया। पार्टी ने ट्विटर पर लिखा, हम महान आध्यात्मिक नेता और विचारक स्वामी विवेकानंद को उनकी जयंती पर याद करते हैं। हम उनकी शिक्षाओं को बनाए रखने और मानवता की सेवा के मार्ग पर चलने की प्रतिज्ञा करते हैं।