Pravrajika Bhaktiprana Mataji Dies
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श्री शारदा मठ और रामकृष्ण शारदा मिशन की बुजुर्ग संन्यासी अध्यक्षा प्रव्राजिका भक्तिप्राण का निधन हो गया। उनका निधन रविवार रात करीब साढ़े ग्यारह बजे हुआ। वे 102 वर्ष की थीं। पिछले कुछ दिनों से दक्षिण कोलकाता के रामकृष्ण मिशन सेवा संस्थान अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। वे अक्तूबर में ही उनका जन्मदिन भी था। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके निधन पर शोक जताया है।
जानकारी के मुताबिक रविवार रात उनके पार्थिव शरीर को दक्षिण कोलकाता के अस्पताल से टॉलीगंज स्थित मातृभवन अस्पताल ले जाया गया। शारदा मठ के सूत्रों ने बताया कि भक्तों को वहां उन्हें अंतिम दर्शन करने का मौका मिलेगा। काशीपुर श्मशान घाट में भक्तिप्राण माताजी का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
उनका जन्म 1920 में तत्कालीन कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। उनका बचपन का नाम कल्याणी बनर्जी था। उन्होंने सरदेश्वरी आश्रम और हिंदू गर्ल्स स्कूल में पढ़ाई की। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, वह 1950 में एक नर्स के तौर पर रामकृष्ण शारदा मिशन मातृ भवन, टालीगंज में शामिल हुईं थीं। साल 1953 में भक्तिप्राण माताजी को स्वामी विज्ञानानंद, श्री रामकृष्ण के प्रत्यक्ष शिष्य और रामकृष्ण मठ और मिशन के चौथे प्राचार्य द्वारा ब्रह्मचर्य में दीक्षित किया गया था।
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, “मैं प्रव्राजिका भक्तिप्राण माताजी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। श्री शारदा मठ और रामकृष्ण शारदा मिशन के माध्यम से समाज सेवा के उनके अथक प्रयासों को सदैव स्मरण किया जाएगा। मैं मठ के सभी सदस्यों और श्रद्धालुओं के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करता हूं।”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को ट्विटर पर लिखा, “श्रद्धेय प्रव्राजिका भक्तिप्राण माताजी, श्री शारदा मठ और रामकृष्ण शारदा मिशन की चौथी अध्यक्ष के निधन के बारे में सुनकर मैं बहुत दुखी हूं। सभी अनुयायियों के लिए एक अतुलनीय क्षति है। वह चिरस्थायी शांति में रहें।
जानकारी के मुताबिक भक्तिप्राण माताजी को बीमारी के कारण 5 दिसंबर को रामकृष्ण मिशन सेवा संस्थान अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था। पता चला है कि संक्रमण फेफड़ों तक फैल गया था। वह तेज बुखार से भी पीड़ित थी। उनकी हालत बहुत नाजुक होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।
भक्तिप्राण माताजी श्री शारदा मठ और रामकृष्ण शारदा मिशन की चौथी अध्यक्षा थीं। अप्रैल 2009 में उन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया था। इससे पहले लंबे समय तक वे टालीगंज स्थित मातृभवन अस्पताल के संपादक के पद पर कार्यरत थीं। उनके हाथों से अस्पताल को 10 बिस्तर वाले प्रसूति वार्ड से 100 बिस्तर वाले आधुनिक अस्पताल में अपग्रेड किया गया था।