विजय दिवस के मौके पर बांग्लादेश से कई बांग्लादेशी योद्धा भारत आएंगे और अपनी यादों को साझा करेंगे। वे बाएंगे कि किस तरह से 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश के जन्म से पहले भारतीय सेना ने 93,000 पाकिस्तानी सेना के जवानों को युद्ध बंदी बना लिया था।
भारतीय सेना की ओर से सेना की पूर्वी कमान मुख्यालय में विजय दिवस से पूर्व आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेजर जनरल डीएस कुशवाहा ने कहा कि विजय दिवस के अवसर पर कोलकाता में 13 से 16 दिसंबर तक विभिन्न जगहों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिससे पता चलेगा कि उस समय ढाका और बांग्लादेश का नजारा कैसा था और भारतीय वीरों ने किस तरह से दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे और बांग्लादेश का जन्म हुआ था। इन कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों के सांस्कृतिक समन्वय को दिखाया जाएगा। इस दौरान भारतीय वीरों के पराक्रम और साहसिक गतिविधियों को भी दिखाया जाएगा।
बांग्लादेश हमेशा भारतियों का ऋणी रहेगा: इलियास
इसी कार्यक्रम में बांग्लादेश के कोलकाता स्थित उप उच्चायोग अंदालीब इलियास ने कहा कि बांग्लादेश की स्वतंत्रता में उनका देश भारतीय सेना और लोगों का सदा ऋणी रहेगा। जिस तरह से भारतीय सेना ने बांग्लादेश की आजादी में भूमिका निभाई, वह भी एक एतिहासिक घटना है। भारत ने जिस तरह से हमारे देश की मदद की, उसका कोई सानी नहीं है।
भारत और बांग्लादेश की दोस्ती औरों से अलग है। भारत का साथ हमेशा बांग्लादेश को मिलता रहा है। उन्होंने कहा, पहली बार 2021 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ने बांग्लादेश का दौरा किया। यह भी आज तक के इतिहास में पहली बार हुआ। इस कार्यक्रम में वयोवृद्ध पत्रकार दीलिप चक्रवर्ती ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिन्होंने एक पत्रकार के रूप में 1971 का युद्ध की रिपोर्टिंग की थी।