Gorkhaland: ज्ञापन सौंपने गोरखा सगंठन
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गोरखाओं के अखिल भारतीय सामाजिक संगठन, भारतीय गोरखा परिसंघ (बीजीपी) के नेतृत्व में गोरखालैंड की मांग को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में गुरुवार को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और असम सहित देश के करीब 18 राज्यों में डीएम, एसडीओ और बीडीओ के माध्यम से ये ज्ञापन सौंपे गए। देशभर में गोरखा संगठनों के अलावा अन्य समूहों का भी भारतीय गोरखा परिसंघ को समर्थन मिला है। यह बात भारतीय गोरखा परिसंघ के अध्यक्ष डॉ. मनीष तमांग ने कही।
उन्होंने कहा, यह हमारी पुरानी मांग है और हमें पूरा विश्वास है कि सरकार इस पर सकारात्मक विाचर करेगी और इसे पूरा करेगी। तमांग ने कहा, परिसंघ की छठी बैठक जो कि कोकराझार में हुई थी, उसमें यह निर्णय लिया गया था कि गोरखालैंड की मांग के समर्थन में 10 अक्तूबर को देशभर में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसी के तहत गुरुवार को भारत के 18 राज्यों में डीएम, डीसी और बीडीओ के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसमें हमें गोरखाओं के अलावा अन्य समूदाय और संगठनों का भी सहयोग मिला है। हमें 350 से अधिक संगठनों का समर्थन हासिल हुआ है। इसी तरह से असम में गुरुवार को राज्य के उपायुक्तों के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए।
ज्ञापन में लिखा है कि सभी भारतीय गोरखाओं और गोरखा संगठनों की ओर से, हम आपसे अनुरोध करते हैं कि कृपया भारत के संविधान के अनुच्छेद 3 (ए) के तहत एक अलग राज्य बनाने के लिए कदम उठाएं और भारत के गोरखाओं की लंबे समय से चली आ रही इच्छा को पूरा करें।
प्रधानमंत्री को याद दिलाया उनका वादा
ज्ञापन में प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा कि 10 अप्रैल 2014 को सिलीगुड़ी में अपने भाषण में आपने कहा था कि गोरखाओं का सपना आपका सपना था (गोरखाओं का सपना मेरा सपना)। 2009 और 2014 में, लोकसभा चुनाव के लिए आपकी पार्टी भाजपा के घोषणापत्र में भी भारत के गोरखाओं के लंबे समय से चले आ रहे संघों पर विचार करने का वादा किया गया था। इसमें कहा गया है कि हम आप पर विश्वास करते हैं और आशा करते हैं कि आप गोरखाओं के अपने राज्य के सपने को जल्द से जल्द पूरा करेंगे।
असम के अमिनगांव में कामरूप जिला गोरखा सम्मेलन के अध्यक्ष अर्जुन छेत्री ने अतिरिक्त उपायुक्त सिद्धार्थ गोस्वामी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। इसी तरह से कोकराझार में बीटीआर गोरखा समाज ने कोकराझार के उपायुक्त बरनाली डेका को ज्ञापन सौंपा। अर्जुन छेत्री ने कहा, हम गोरखा समुदाय के अधिकारों, सशक्तीकरण और उत्थान के लिए लड़ रहे हैं। गोरखाओं की गलत पहचान के कारण उनके साथ कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। बहुत शोध, विचार-विमर्श और बहस के बाद, भारतीय गोरखा परिषद ने भारत के गोरखाओं के लिए एक अलग गोरखालैंड के मुद्दे को दृढ़ता से उठाया है, जो कि समुदाय की विदेशी के रूप में गलत पहचान का एकमात्र लोकतांत्रिक और स्थायी समाधान है।