दक्षिण एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई प्रमुख शहरों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं, जिसके बाद दोनों देशों के बीच खुली जंग जैसे हालात बन गए हैं। पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके “ऑपरेशन गजब-लिल-हक” के तहत किए गए हमलों में 133 अफगान लड़ाके मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए हैं।
पाकिस्तानी वायुसेना ने राजधानी काबुल और दक्षिणी शहर कंधार सहित कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई सीमा पार से हुए कथित हमलों के जवाब में की गई है। पाकिस्तान का कहना है कि इस अभियान में तालिबान के 27 ठिकानों को नष्ट कर दिया गया और नौ पर कब्जा कर लिया गया।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर बेहद कड़ा बयान देते हुए कहा कि अब पाकिस्तान का धैर्य समाप्त हो चुका है। उन्होंने लिखा कि “अब हमारे और तुम्हारे बीच खुली जंग है।” उन्होंने तालिबान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने अफगानिस्तान को आतंकवादियों का केंद्र बना दिया है और भारत का प्रतिनिधि बनकर क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने लंबे समय तक कूटनीतिक प्रयासों से हालात सामान्य रखने की कोशिश की, लेकिन तालिबान ने पाकिस्तान की सुरक्षा को चुनौती दी। उनके बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि पाकिस्तान ने पिछले पांच दशकों में लाखों अफगान शरणार्थियों को पनाह दी है।
तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि उसने सीमा पर जवाबी कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और कई चौकियों पर कब्जा कर लिया। अफगान अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान के मिसाइल हमलों में नागरिक और शरणार्थी भी घायल हुए हैं।
हालांकि पाकिस्तान ने इन आंकड़ों को खारिज करते हुए कहा कि उसकी सेना को सीमित नुकसान हुआ है और केवल दो सैनिक मारे गए हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि देश की सेना किसी भी आक्रामक कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। वहीं गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस अभियान को पाकिस्तान की संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया।
पाकिस्तानी मीडिया, विशेष रूप से जियो न्यूज, ने रिपोर्ट दी कि यह ऑपरेशन खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू किया गया था और इसका उद्देश्य सीमा पार से होने वाले हमलों को रोकना था।
इस बढ़ते संघर्ष पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने गहरी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2021 में नाटो सेनाओं की वापसी के बाद से अफगानिस्तान में सुरक्षा हालात जटिल बने हुए हैं। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि उसकी सीमा पर सक्रिय आतंकी समूहों को अफगान क्षेत्र से समर्थन मिल रहा है, जबकि तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
इस नए सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों देशों के बीच सीमा पहले से ही संवेदनशील रही है और इस तरह की कार्रवाई बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों पक्ष जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं तलाशते हैं, तो यह संघर्ष न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।