लखीमपुर खीरी। पड़ोसी जिला पीलीभीत में खालिस्तान समर्थक तीन आतंकवादियों के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद भारत-नेपाल सीमा से सटा तराई का ये इलाका एक बार फिर चर्चा में है। चाहे 80-90 के दशक का खालिस्तानी आतंकवाद का दौर रहा हो या उसके बाद के बड़े आपराधिक घटनाक्रम, ये सीमाई क्षेत्र और इससे सटे घने जंगल हमेशा से अपराधियों की सुरक्षित शरण स्थली रहे हैं।
अकेले खीरी जिले में ही भारत-नेपाल की करीब 120 किमी लंबी खुली सीमा है। इस सीमा पर लखीमपुर के गौरीफंटा, तिकुनिया और संपूर्णानगर-बसही से नेपाल जाने के वैध रास्ते हैं, जहां एसएसबी समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी रहती है, पर लंबी सीमा से सटे जंगलों के बीच से तमाम ऐसे चोर रास्ते भी हैं, जहां से नेपाल पहुंचा जा सकता है। इसके साथ ही घने जंगल अपराधियों के छिपने में मुफीद होते हैं।
उधर, बीती अक्तूबर से जिले से लगी भारत-नेपाल सीमा का इलाका फिर चर्चा में है। बीती 24 अक्तूबर को भारत-नेपाल सीमा के थाना संपूर्णानगर के अंतर्गत खजुरिया की एसएसबी चेकपोस्ट पर दिल्ली पुलिस की मोस्ट वांटेड अन्नू धनखड़ पकड़ी गई थी। वह नेपाल भागने की फिराक में थी। वर्ष 2017 में जब डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जेल भेजा गया था तो उनकी खासमखास हनीप्रीत के खीरी के ही रास्ते नेपाल भागने की चर्चा हुई थी। अब पड़ोसी जिला पीलीभीत के पूरनपुर में तीन आतंकियों के एनकाउंटर के बाद संवेदनशीलता को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है। एसपी गणेश प्रसाद साहा का कहना है कि सीमा पर हर आने-जाने वाले पर निगाह रखी जा रही है।
ये रहे चर्चित मामले
-जनवरी 2016 में सिंगाही के खैरीगढ़ निवासी कोल्हू व्यवसायी की तीन बेटियों का अपहरण करने वाले बदमाशों ने सीमा से सटे जंगलों में ही ठिकाना बनाया था।
-वर्ष 2013 से 2028 तक जिले में आतंक का पर्याय रहे दुर्दांत अपराधी डालू गुप्ता और बग्गा सिंह भी भारत नेपाल सीमा क्षेत्र और यहां के जंगलों से ही अपनी जरायम की दुनिया चलाते थे।
120 किमी लंबी है सीमा
खीरी जिले से लगी 120 किमी लंबी भारत नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा है। ये सीमा नोमेंस लैंड के पिलर संख्या 98 बंदरिया, बरसोला थाना तिकुनिया से शुरू होकर पिलर संख्या 211 खजुरिया थाना संपूर्णानगर तक है। इस अंतरराष्ट्रीय सीमा का अधिकांश क्षेत्र जंगल से सटा होने के कारण तमाम गुप्त रास्ते हैं, जिसका फायदा उठाकर न सिर्फ तस्करी जैसे अपराध को अंजाम दिया जाता है, बल्कि अपराधी स्वयं भी आसानी से इस पार से उस पार चले जाते हैं।
सुरक्षा में तैनात हैं कई एजेंसियां
भारत-नेपाल सीमा पर खीरी जिले में एसएसबी की 33 चौकियां हैं। इसके अलावा बाॅर्डर क्षेत्र से सटे चार थाने संपूर्णानगर, चंदनचौकी, गौरीफंटा और तिकुनिया हैं, जिनकी पुलिस भी तैनात रहती है। इसी वर्ष सीमा क्षेत्र में पुलिस की 15 कवच आउट पोस्ट भी बनाई गई हैं। सीमा पर खुफिया तंत्र के अलावा वन विभाग का स्टाफ भी निगरानी में तैनात रहता है। गौरीफंटा बॉर्डर पर कस्टम का भी कार्यालय है।
महंगापुर के श्री गुरु तेग बहादुर स्कूल में कबड्डी में प्रतिभाग करते स्कूली बच्चे। संवाद