बुलंदशहर की सुनारों वाली गली स्थित विष्णु प्यारी धर्मशाला में रविवार को मानव उत्थान सेवा समिति का दो दिवसीय संत सद्भावना सम्मेलन शुरू हो गया। मुख्य वक्ता शरणानंद ने कहा कि सद्भावना की जननी अध्यात्मिक शिक्षा है। मुख्य वक्ता शरणानंद ने कहा कि सतपाल महाराज के द्वारा और उनके संत-साध्वी विश्व के सभी देशों में प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को तभी जान सकते हैं, जब सनातन तत्व का ज्ञान जानने की चेष्ठा करेंगे। हापुड़ से आईं निरंजना बाई ने समस्या की सद्भावना मानव के अंदर तभी विकसित हो सकती है। जब मानव अध्यात्मिक संतों की संगत में शामिल होगा। संतों के सत्संग व प्रवचन को ध्यान से श्रवण करने से ही चेतना जागृत होगी। ऐसा होने पर हम मानव से महामानव बन जाएंगे। शंभू दयाल ने कहा कि सत्संग से ही भाग्य उदय होता है।