84 कोसी परिक्रमा मार्ग : सह खातेदारों के एक साथ दावा की बात कर रहा विभाग, किसानों में नहीं बन पा रही सहमति
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। प्रस्तावित 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वाले गांवों के किसानों को मुआवजा मिलने में कई तरह की दुश्वारियां हैं। किसी का मुआवजा बनाने में छूट गया तो किसी को सही जानकारी न होने से भागदौड़ करनी पड़ रही है। खासकर थ्री-ए की प्रक्रिया से छूटे किसानों को सबसे ज्यादा समस्या झेलनी पड़ रही है। क्योंकि मुआवजा बनाने की प्रक्रिया काफी उलझाऊ है। किसान डरे हुए हैं कि कहीं बिना मुआवजा दिए उनकी भूमि अधिग्रहित न कर ली जाए।
ग्राम मजगवा पाठक के सूर्य प्रकाश बताते हैं कि उनका गांव प्रथम चरण के गजट में छूट गया था। किसी तरह से गजट हो गया। मगर, उसके बाद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। इससे मुआवजे में काफी देरी हो रही है। यदि समय से मुआवजा मिल जाता तो किसान अपने रुपये का कहीं इस्तेमाल कर लेते। अधिकारी इतना लेट क्यों कर रहे है, यह समझ के परे है।
दुखेड़ी गांव के पारस नाथ का कहना कि जिनकी जमीन तन्हा है, उन्हें मुआवजा मिल रहा है। जबकि, संयुक्त खाताधारकों को दौड़ाया जा है। उनका कहना है कि लेखपाल सभी को एक साथ आने की बात कहते हैं। इसमें समस्या यह है कि गांव में सभी का आपस में इतना अच्छा तालमेल नहीं होता है कि वे एक साथ एकत्र हो जाएं। एक घर में यदि तीन-चार भाइयों के नाम से जमीन है तो उसका मुआवजा भी फंसा हुआ है।
बरसांव गांव के संतोष पांडेय बताते हैं कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसानों को सही जानकारी देने वाला कोई नहीं है। गांव में लेखपाल आते हैं और नाम नोट कर चले जाते हैं। किस किसान की कितनी जमीन अधिग्रहित की जाएगी, कितना मुआवजा मिलेगा, इस बारे में सटीक जानकारी देने वाला कोई नहीं है। 50-60 किमी चलकर भूमि अधिग्रहण अधिकारी के पास जाने पर वहां लिपिक समय से सीट पर मिलते ही नहीं हैं।
इन दिनों परशुरामपुर ब्लॉक के संसारपुर, मजगवा, दुखेड़ी, बेरसा आदि गांवों के 20 से अधिक काश्तकार अपनी जमीनों का गजट कराने के लिए दौड़ लगा रहे हैं। प्रभाकर, लक्ष्मी प्रसाद, परमात्मा आदि का कहना है कि उनकी जमीन की पैमाइश सड़क के लिए की गई थी। बावजूद इसके गजट प्रक्रिया में इसे शामिल नहीं किया गया। जबकि वे लोग अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होने के समय से आश्वस्त थे कि प्रशासन एक समान कार्रवाई करेगा।
84 कोसी परिक्रमा मार्ग के प्रथम चरण की सड़क के लिए जिले के 56 गांवों में कुल 180 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। इसके लिए वर्ष 2023 से पैमाइश चल रही थी। इसके बाद थ्री-ए की कार्रवाई की गई। इसमें चिह्नित जमीनों का गजट कराया गया। मगर, 56 में से 29 गांव छूट गए। पहली बार प्रकाशन के बाद छूटे हुए काश्तकारों ने दौड़भाग किया तो विभाग ने जून माह में 29 गांवों की दोबारा थ्री-डी की कार्रवाई कराई। हालांकि, अभी इन गांवों में अधिकतर जगहों की अवार्ड प्रक्रिया पूरी नहीं हुई हैं। इस प्रक्रिया में भी कुछ गांवों के काश्तकारों की जमीन प्रथम चरण के थ्री-ए की कार्रवाई से वंचित हैं।
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56 गांवों के 6900 काश्तकार हुए थे चयनित
भूमि अधिग्रहण के लिए बस्ती जिले के 56 गांवों के 6900 काश्तकार मुआवजे के लिए चिह्नित किए गए थे। इसमें से अभी सौ से अधिक काश्तकारों की जमीन की निशानदेही या अवार्ड प्रक्रिया आधी-अधूरी है। प्रशासन की तरफ से फरवरी में जिन 50 गांवों में अवार्ड प्रक्रिया पूरी होने की बात कही जा रही है, वहां भी तमाम किसान छूट गए हैं। इससे काश्तकार और विभाग के बीच मुआवजे की धनराशि को लेकर विवाद की स्थिति बन रही है।
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कोट
जहां पर पहले चरण की थ्री-ए की कार्रवाई में 29 गांव छूटे हुए थे, वहां थ्री-डी की कार्रवाई चल रही है। मुआवजे के लिए यदि संयुक्त खाता है तो सभी को एक साथ दावा प्रस्तुत करना चाहिए। विभागीय स्तर पर किसी का नुकसान नहीं होने पाएगा। किसान इससे वंचित हैं तो कार्यालय में प्रार्थनापत्र दे सकतेे हैं।
-मनोज प्रकाश, प्रभारी, विशेष भूमि आधिपत्य अधिकारी
शामली कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते बसपा कार्यकर्ता । संवाद