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राम मंदिर में बदली वर्षों पुरानी परंपरा: अब तृतीया से शुरू हुआ रामलला का झूलनोत्सव

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में सावन शुक्ल तृतीया से झूलनोत्सव की नई परंपरा का शुभारंभ हो गया। शनिवार को पहली बार रामलला की उत्सव मूर्ति की भव्य पालकी यात्रा राम मंदिर से कुबेर टीला तक निकाली गई। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मंगलध्वनि के बीच निकली इस यात्रा में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास के निर्देशन में निकली पालकी यात्रा में उत्सव मूर्ति को विधि-विधान से कुबेर टीला ले जाया गया। वहां स्थित प्राचीन वृक्ष पर भगवान रामलला को झूला झुलाया गया और विशेष पूजा-अर्चना की गई। अब तक राम मंदिर में सावन शुक्ल पंचमी से झूलन उत्सव मनाने की परंपरा थी, लेकिन इस वर्ष से इसका शुभारंभ सावन शुक्ल तृतीया से किया गया है। मंदिर प्रशासन के अनुसार यह नई परंपरा आगामी वर्षों में भी जारी रहेगी कुबेर टीला पर प्रथम झूलन के बाद 16 अगस्त से प्रतिदिन रामलला की उत्सव मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में झूले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देगी। झूलनोत्सव के दौरान विशेष शृंगार, पूजन और आरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

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