सांझा अध्यापक मोर्चा और टीचर संगठनों के नेताओं जसबीर सैनी, सतवंत तूरा, जसबीर भंगू, सतनाम रंधावा, गुरमुख सिंह, गणेश भगत, दलजीत सैनी, अजय कुमार, सतनाम परमार की लीडरशिप में सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार के कहने पर लगाई गई टेट की पूरी तरह गैर-जरूरी, गैर-संवैधानिक शर्त, बजट सेशन के दौरान टीचरों की सर्विस सिक्योरिटी के लिए बिल न लाने, सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन फाइल न करने, एजुकेशन डिपार्टमेंट द्वारा कुछ कैटेगरी को टेट से छूट देने वाले लेटर को रिजेक्ट करने, प्रोटेस्ट के दौरान वाटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों के अंधाधुंध इस्तेमाल, टीचरों को घायल करने और देश बनाने वाले टीचरों के सम्मान और इज्ज़त को ठेस पहुंचाने के विरोध में गोल चौक पर पंजाब सरकार का पुतला फूंका गया। नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में टीचरों की कोई भी समस्या हल करने के बजाय, टीचरों के सभी वर्गों पर सिर्फ़ पुलिसिया ज़ुल्म किया है। पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली के लिए एक लचर नोटिफ़िकेशन जारी करने के बावजूद, इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है, सैलरी रिवीजन का बकाया, महंगाई भत्ते की बाकी किश्तें और जारी किश्तों का बकाया धूल में मिला दिया गया है, रिवीजन के नाम पर रोके गए सभी भत्ते बहाल नहीं किए जा रहे हैं, पे कमीशन की पूरी रिपोर्ट जारी नहीं की गई है, स्कूलों में टीचरों और स्कूल हेड के हज़ारों पद खाली होने के बावजूद, बेरोज़गार टीचरों को नौकरी नहीं दी जा रही है। सरकार खजाना भरने का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन टीचरों की पैसे की दिक्कतें हल नहीं की जा रही हैं। ज़्यादातर टीचर फरवरी महीने की सैलरी के लिए तरस रहे हैं। इन समस्याओं को हल करने के बजाय, सेवारत टीचरों के सिर पर छंटनी की तलवार लटका दी गई है। इस प्रदर्शन में अमृतपाल सिंह, गौरव राठौर, तीरथ सिंह, परमजीत सिंह, मनजीत गाठ, रविंदर कुमार, विक्रमजीत, अकबर खान, गुरमीत, सुखदेव सिंह, सरबजीत कुमार, सुखदेव सिंह, मोहित, रूपिंदर सिंह, कुलविंदर, अशोक कुमार, रानी, राधिका, राधिका सिक्का अमरजीत कौर परमिंदर कौर सीमा सैनी, उर्मिला, कुलविंदर कौर, सुरजीत कौर, रजनी, सोनिया, अनीता, हरप्रीत सिंह, लखवीर सिंह आदि मौजूद थे