पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले डेरा सचखंड बल्लां राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। श्री गुरु रविदास बाणी अध्ययन केंद्र की आधारशिला रखे जाने के बाद आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ तेज हो गई है। यह लड़ाई केवल परियोजनाओं के श्रेय तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य रविदासिया समाज और व्यापक दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना है। दोआबा में दलित आबादी करीब 38 फीसदी है। इन 23 सीटों में से आठ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। बाकी 15 सामान्य सीटों पर भी दलित मतदाताओं का प्रभाव चुनावी नतीजे तय करता है। डेरा बल्लां का सामाजिक नेटवर्क जालंधर और होशियारपुर के अलावा कपूरथला और नवांशहर तक फैला है। इसका राजनीतिक प्रभाव दोआबा की सभी 23 सीटों पर महसूस किया जा सकता है। आम आदमी पार्टी मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा बाणी अध्ययन केंद्र की आधारशिला को अपनी उपलब्धि बता रही है। यह परियोजना पहले घोषित हुई थी, जिसे अब जमीन पर उतारा जा रहा है।