चंडीगढ़ अपराधियों के लिए आसान टारगेट बनता जा रहा है। गैंगस्टर और शातिर बदमाश शहर को सेफ ऑपरेटिंग जोन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी आसानी से मोहाली और पंचकूला की ओर निकल जाते हैं जिससे पुलिस के हाथ खाली रह जाते हैं। ट्राइसिटी का ओपन बॉर्डर अपराधियों के लिए सबसे बड़ी सहूलियत बन गया है। चंडीगढ़ में प्रवेश और निकास के कुल 22 रास्ते हैं जिनसे होकर बदमाश बिना सख्त जांच के शहर में दाखिल होते हैं और घटना के बाद कुछ ही मिनटों में सीमा पार कर लेते हैं। कई बॉर्डर प्वाइंट पर न तो कड़ी चेकिंग होती है और न ही पर्याप्त निगरानी व्यवस्था मौजूद है। मुल्लांपुर और तोगां बैरियर की ओर पड़ने वाले पांच बॉर्डर प्वाइंट सुरक्षा के लिहाज से सबसे कमजोर कड़ी माने जा रहे हैं। यहां कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों का अभाव है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों को ट्रेस करना पुलिस के लिए चुनौती बन जाता है। इस निगरानी की कमी का सीधा फायदा गैंगस्टर उठा रहे हैं।शहर के कारोबारी वर्ग में भी डर का माहौल है।