परम पावन 14वें दलाई लामा ने लोगों से करुणा का अभ्यास करने का आग्रह किया और इसे सबसे महत्वपूर्ण गुण बताया। उन्होंने कहा कि करुणा से कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने दूसरों को सर्वोपरि रखने, उनकी भलाई को महत्व देने और जहाँ भी संभव हो, मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रवचनों में शामिल होने आए विशाल जनसमूह पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, परम पावन ने याद दिलाया कि भारत, एक लोकतांत्रिक देश होने के नाते, नागरिकों को सभी के कल्याण के लिए अपने अधिकारों का जिम्मेदारी से उपयोग करने का अवसर प्रदान करता है।