राज्य में SIR पर पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बताया, "जल्दबाजी का काम शैतान का होता है, वही काम चुनाव आयोग का हो रहा है। जिस तरह एक महीने के अंदर मतदाता सूची बनाने की बात कही जा रही है। इसमें कई पात्र लोग हिस्सा नहीं ले पाएंगे और अवैध मतदाता अपना नाम देकर जाएंगे। 16 BLOs की आत्महत्या की घटनाएं सामने आ गई। चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर के बहाने आदिवासी समुदाय को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा है कि रोजगार की तलाश में बाहर गए आदिवासियों के घरों में न होने के दौरान ही मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया चला दी गई, जिससे उनका नाम कटने का खतरा बढ़ गया।
पार्टी का मानना है कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और प्रधानमंत्री के लिए एक 'चुनाव चोरी शाखा' के रूप में काम कर रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से जानबूझकर कुछ लोगों के नाम काटे जा रहे हैं, जो चुनाव आयोग के राजनीतिकरण का संकेत है।
कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर अत्यधिक दबाव बढ़ने और प्रशिक्षण की कमी के कारण आत्महत्या/मौतों तक की दुखद घटनाओं का उल्लेख किया है, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी इस पूरी प्रक्रिया को 'संविधान पर हमला' करार दे रही है, क्योंकि यह लाखों पात्र मतदाताओं के वोट के अधिकार को छीनने का प्रयास है।
इन आरोपों के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने सड़क से लेकर संसद तक और सुप्रीम कोर्ट तक विरोध करने का ऐलान किया है। पार्टी ने एसआईआर और चुनाव आयोग के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और दिल्ली के रामलीला मैदान में मेगा रैली करने की घोषणा भी की है। कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति से भी शोषित-वंचित समाज के वोट के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने और एसआईआर प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है।