राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल से चलने वाली पुरानी गाड़ियों के बैन को लेकर उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीएम रेखा गुप्ता को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि दिल्ली ऐसी पाबंदी के लिए तैयार नहीं है। मध्यम वर्ग अपने जीवन की पूरी कमाई लगाकर एक कार खरीदता है। ऐसे में ये आदेश उन लोगों के लिए गलत होगा। एलजी ने आगे कहा कि इस प्रकार के आदेश को स्थगित रखा जाए। इसके साथ ही एलजी ने दिल्ली सरकार से सुप्रीम कोर्ट में 2018 के आदेश को लेकर समीक्षा याचिका दायर करने को कहा है। एलजी ने कहा कि दिल्ली ऐसे प्रतिबंधों के लिए तैयार नहीं है। इससे लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह सीएक्यूएम के अध्यक्ष से इस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का अनुरोध करे।
एलजी ने आगे कहा कि इस प्रकार के दिशा-निर्देश अन्य शहरों जैसे मुंबई, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे शहरों में पूरी तरह से वैध माने जाते हैं। ये संविधान में उल्लेखित समानता और स्पष्टता के सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने सीएम से आग्रह करते हुए कहा कि 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की जाए। एलजी ने कहा कि उन्हें पिछले कुछ दिनों समाज के जनप्रतिनिधियों, नागरिकों से कुछ प्रतिक्रिया मिली है जिनका मानना है कि ये नीतियां ग्राउंड पर लागू नहीं की जा सकती।उपराज्यपाल ने सुझाव देते हुए कहा कि दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हो रहा है। आरआरटीएस कॉरिडोर, अर्बन एक्सटेंशन रोड, हरियाली अभियान, एंटी स्मॉग गन और सड़कों की सफाई। उन्होंने कहा कि अब दिल्ली की स्थिति बदल गई है।
सीएक्यूएम से एलजी ने कहा कि वह अपने निर्देशों पर विचार करे और पूरी तैयारी से उसे स्थगित करे। इसके साथ ही 3 महीने में एक व्यापक प्रदूषण नियंत्रण योजना तैयार की जाए, जिसमें सार्वजनिक परिवहन, निर्माण कार्य और ईवी को लेकर स्पष्ट निर्देश हो।इससे पहले 1 जुलाई से दिल्ली सरकार ने CAQM के निर्देश पर पुराने वाहनों को ईंधन देना बंद कर दिया था और पेट्रोल पंपों पर पहुंचने वाले ऐसे वाहनों को जब्त कर उन्हें स्क्रैपिंग के लिए भेजा जा रहा था. इस कदम ने न सिर्फ आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा की, बल्कि विशेषज्ञों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाए.
‘पुरानी गाड़ियों को हटाना समाधान नहीं’एलजी सक्सेना ने इस पूरे मुद्दे पर व्यापक रणनीति बनाए जाने की बात कही है. उन्होंने कहा कि सिर्फ गाड़ियों को सड़कों से हटाना ही समाधान नहीं है, बल्कि एक समग्र प्रदूषण नियंत्रण योजना होनी चाहिए, जिसमें सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, सड़कों की धूल और निर्माण कार्यों से फैलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना और हरियाली को बढ़ावा देना शामिल हो.