भाजपा ने अपने दिल्ली ऑफिस के बाहर बड़े पोस्टर लगाए हैं, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तुलना 2020 के दिल्ली दंगों के जेल में बंद आरोपी उमर खालिद से की गई है। BJP के नेशनल स्पोक्सपर्सन R.P. सिंह ने ये होर्डिंग्स लगाए हैं, जिनकी हेडलाइन है: "एक अराजक तरीका, देशद्रोहियों के अलग-अलग चेहरे।
भाजपा प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने AI इंपैक्ट समिट में यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर कहा, "ये मामला मुझे उमर खालिद ने जो किया था, उसकी याद दिलाता है। उमर खालिद ने भी जब ट्रंप भारत आए थे तब भारत को बदनाम करने के लिए यहां दंगा कराया, प्रदर्शन कराए, CAA का नकली विरोध खड़ा किया था। राहुल गांधी ने भी उसी उमर खालिद की लाइन पर चलते हुए जब दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि यहां भारत में थे तब उनके सामने भारत को बदनाम करने के लिए षड्यंत्र रचा।
एआई इंपैक्ट समिट के दौरान राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब भारतीय जनता पार्टी ने अपने दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर लगाए, जिनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तुलना वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में जेल में बंद आरोपी उमर खालिद से की गई। इन पोस्टरों को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने यह कदम ऐसे समय उठाया जब एआई इंपैक्ट समिट के आयोजन के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था।
भाजपा का आरोप है कि विपक्ष और उससे जुड़े संगठन देश में अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, जबकि कांग्रेस और यूथ कांग्रेस ने इन आरोपों को निराधार और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है। पोस्टरों में राहुल गांधी और उमर खालिद की तस्वीरों को साथ दिखाते हुए कथित रूप से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि दोनों की विचारधारा एक जैसी है। इस मुद्दे ने राजधानी दिल्ली की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की तुलना कर रही है, जबकि भाजपा प्रवक्ताओं का दावा है कि यह विपक्ष की कथित दोहरी राजनीति को उजागर करने का प्रयास है।
गौरतलब है कि राहुल गांधी वर्तमान में लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और वे केंद्र सरकार की नीतियों पर लगातार हमलावर रहे हैं। ऐसे में भाजपा द्वारा लगाए गए ये पोस्टर राजनीतिक संदेश देने की रणनीति के तौर पर देखे जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की पोस्टर राजनीति से दोनों दलों के बीच टकराव और तेज हो सकता है, खासकर तब जब राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न नीतिगत मुद्दों को लेकर बहस जारी है। कुल मिलाकर, एआई इंपैक्ट समिट के समानांतर चला यह पोस्टर विवाद एक बार फिर दिखाता है कि देश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और प्रतीकात्मक संदेशों की अहम भूमिका बनी हुई है।