कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "विकास की राजनीति और विभेद की राजनीति, यानी ध्रुवीकरण की राजनीति, विकास का दिखावा करने वाली राजनीति शुरू हो गई है.हमें पश्चिम बंगाल में विकास से कोई आपत्ति नहीं है। हम सत्ताधारी पार्टी TMC और केंद्र की BJP से पूछना चाहते हैं: आपके राज्यों से कितने उद्योग विदेश चले गए हैं, और इसके क्या कारण हैं? केंद्र सरकार को बताना चाहिए कि डॉलर के मुकाबले हमारे रुपये की कीमत क्यों गिर रही है, और राज्य सरकार को भी बताना चाहिए कि उनके कार्यकाल में पश्चिम बंगाल से कितने उद्योग बाहर चले गए हैं
जनवरी 2026 में ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा राज्य में दंगे भड़काने की साजिश रच रही है। ममता बनर्जी के अनुसार, भाजपा को यह एहसास हो गया है कि वह 2026 का विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाएगी, इसलिए वह सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला बोलने वाले प्रवासी मजदूरों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बंगाल में लोगों के गुस्से को भड़काना और अस्थिरता पैदा करना है।
मुर्शिदाबाद की घटना: मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में प्रवासी श्रमिकों पर हमलों के विरोध में हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह भाजपा की गहरी साजिश का हिस्सा है।इसके विपरीत, भाजपा नेताओं ने भी ममता बनर्जी पर दंगों की साजिश रचने और उन्हें बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगाए हैं:
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया और अन्य नेताओं ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी अपनी हार के डर से हिंदू-मुस्लिम दंगों को उकसाना चाहती हैं ताकि वोटों का ध्रुवीकरण हो सके। चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के दौरान ममता बनर्जी के कड़े विरोध और "आग से खेलने" वाली चेतावनियों को भाजपा ने हिंसा भड़काने की धमकी बताया है। जनवरी 2026 में जब ED ने I-PAC के दफ्तर पर छापा मारा, तो ममता बनर्जी खुद वहां पहुंच गई थीं। भाजपा ने इसे 'संवैधानिक मशीनरी का दुरुपयोग' और जांच में बाधा डालकर अशांति फैलाने की कोशिश करार दिया।
वर्ष 2025 में वक्फ कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान भी ममता बनर्जी ने केंद्र पर बंगाल में दंगे कराने की साजिश का आरोप लगाया था।भाजपा ने कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दी हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री के बयानों से राज्य की कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
वर्तमान में स्थिति यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर "साजिश" रचने का आरोप लगा रहे हैं। जहाँ ममता बनर्जी इसे भाजपा द्वारा बंगाल को अस्थिर करने और चुनाव जीतने का हथकंडा बता रही हैं, वहीं भाजपा इसे ममता बनर्जी की "ध्रुवीकरण की राजनीति" और केंद्रीय एजेंसियों की जांच से बचने का रास्ता बता रही है।