हजारों किसानों की खेती पर बना संकट, प्राकृतिक आपदा से ध्वस्त हुई थी तीन सौ मीटर नहर
जल शक्ति मंत्री के समक्ष जल्द समस्याएं रखेगा कृषक विकास संघ
राकेश शर्मा
निरमंड (कुल्लू)। श्रीखंड महादेव की पहाड़ियों में 31 जुलाई, 2024 को बादल फटने से कुर्पण खड्ड में आई बाढ़ से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। बाढ़ की चपेट में कुर्पण खड्ड सिंचाई योजना भी आई थी, जिसका तीन सौ मीटर हिस्सा ध्वस्त हो गया था। अब छह माह से सिंचाई सुविधा न मिलने के कारण आठ पंचायतों के हजारों किसानों की खेती पर संकट खड़ा हो गया है। उपमंडल निरमंड की आठ पंचायतों में बीते छह माह से सिंचाई की सुविधा न मिलने से सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। बादल फटने के कारण ध्वस्त हुई कुर्पण खड्ड सिंचाई नहर बजट के अभाव में मरम्मत को तरस गई है। क्षेत्र की आठ पंचायतों की जीवनदायिनी सिंचाई नहर की मरम्मत न होने से किसान-बागवान परेशान हैं। इन पंचायतों के करीब सात हजार से ज्यादा किसान, बागवान बिना सिंचाई सुविधा के दिक्कतें झेल रहे हैं। कुर्पण कुहल कृषक विकास संघ निरमंड ने लंबे समय से नहर की हालत न सुधरने पर चिंता जताई है और सरकार से बजट का प्रावधान जल्द नहर को दुरुस्त कर सिंचाई की सुविधा देने की मांग उठाई है। है। 17 किलोमीटर लंबी इस सिंचाई नहर से क्षेत्र की कोट, बड़ीधार, तवार, भालसी, शिशवी, डीम और बाहवा आदि पंचायतों के अलावा नगर पंचायत निरमंड के किसान भी लाभान्वित होते हैं। इस सिंचाई नहर और वर्षा पर आधारित खेती के कारण फसलें उगाई नहीं जा रही। सेब की नर्सरी लगाई है वो खत्म होने की कगार पर है।
बिना जल सिंचाई हुई मुश्किल
कुर्पण कुहल कृषक विकास संघ निरमंड के प्रधान प्रदीप स्नेही, उपप्रधान प्रेम सिंह राठौर, अशोक शर्मा, दीपेक्ष शर्मा, भलकू राम, दीपक शर्मा, ताबे राम, संजीव कुमार, अमर सिंह, राकेश कुमार सहित अन्य ने कहा कि बादल फटने से आई बाढ़ की चपेट में कुर्पण नहर का मेन हेड करीब 300 मीटर तक ध्वस्त हो गया है। कई स्थानों पर नहर टूट गई है। इस कारण छह माह से सिंचाई की सुविधा ठप पड़ी है। क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सड़कों की रिकॉर्ड समय में मरम्मत की गई और बेली ब्रिज बनाए गए, लेकिन हजारों किसानों बागवानों की समस्या अब तक जस की तस है। उन्होंने कहा कि बिना पानी किसानों को जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है। समस्या को लेकर जल्द ही जल शक्ति मंत्री से संघ का एक प्रतिनिधिमंडल मिलेगा।
इस सिंचाई नहर की मरम्मत का एस्टीमेट बनाकर सरकार को भेजा है। जैसे ही बजट आएगा, मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - किशोर कुमार एक्सईएन, जलशक्ति विभाग, आनी