गीता जयंती के अवसर पर स्थानीय महिलाओं का एक अनोखा और प्रेरणादायक पहल सामने आई है। आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गांव फतेहपुर की ममता रानी ने शहद उत्पादन (हनी प्रोसेसिंग) को अपने जीवन का आधार बनाते हुए, अब अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ने का अभियान शुरू किया है। जानकारी के अनुसार, वह पिछले कई वर्षों से घरेलू स्तर पर शहद उत्पादन का काम कर रही हैं और इससे न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि अब दूसरी महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा रही हैं। गीता जयंती के अवसर पर उन्होंने महिलाओं के एक समूह को एकत्र कर शहद निर्माण की प्रक्रिया, बाजार में इसकी बढ़ती मांग और इससे होने वाली आय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शहद उत्पादन कम पूंजी में शुरू किया जा सकता है और ग्रामीण इलाकों में इसकी संभावनाएं काफी अधिक हैं। उनके अनुसार, महिलाएं यदि छोटे स्तर पर भी इस काम को शुरू करें तो घर बैठे आय अर्जित कर सकती हैं। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने भी इस पहल में दिलचस्पी दिखाई और प्रशिक्षण लेकर इस क्षेत्र से जुड़ने की इच्छा जताई। नीलम व्यासपुर के गांव रामपुर जूट के कान्हा जी के वस्त्र बनाती हैं और 7 साल से अधिक समय से कार्य कर अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहीं है।