भिवानी। भिवानी जिला परिषद चेयरपर्सन पद पर अनिता मलिक ही बनी रहेंगी। उनकी कुर्सी को लेकर मंगलवार दोपहर 12:30 बजे भिवानी के डीआरडीए सभागार में डीसी की अध्यक्षता में अविश्वास बैठक हुई। करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक में 16 जिला पार्षद पहुंचे और छह जिला पार्षद गैर हाजिर रहे। अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराया गया।
इसमें 13 पार्षदों ने पक्ष और तीन ने अविश्वास प्रस्ताव के विपक्ष में मतदान किया। बैठक में चेयरपर्सन के खिलाफ दो तिहाई बहुमत साबित नहीं हुआ। नियम के अनुसार 15 पार्षदों के मत अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष होने चाहिए थे। तभी अनिता मलिक को जिप चेयरपर्सन पद से हटाया जा सकता था। अब अनिता मलिक जिप चेयरपर्सन की चेयरपर्सन बनी रहेंगी।
अनिता मलिक ने नाम न लेते हुए राज्यसभा सदस्य और मंत्री पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य और मंत्री उन्हें हटाना चाहती थी, लेकिन जनता और पार्षदों ने उनका साथ दिया। डंके की चोट पर फिर जिप चेयरपर्सन बनी हूं।
अनिता मलिक ने यह भी कहा कि उनकी सोच अच्छी है और भगवान भी अच्छे के साथ अच्छा करता है। काम किया है और काम करेंगे। पार्टी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनके साथ हैं। दरअसल भाजपा को छोड़कर कांग्रेस में जाने के बाद से ही जिप की राजनीति में घमासान मचा था। इसी के नतीजतन 23 दिसंबर को 15 पार्षदों ने डीसी को अविश्वास प्रस्ताव बैठक बुलाने का शपथपत्र दिया था। इसके बाद ही सात जनवरी की बैठक तय हुई थी।
भाजपा बनाम कांग्रेस का चुनाव कराने के लिए लाया गया था अविश्वास प्रस्ताव
जिला परिषद की राजनीति में पार्षदों को मोहरा बनाकर भाजपा बनाम कांग्रेस का चुनाव कराने के लिए ही अविश्वास प्रस्ताव पर दांव खेला गया था। अनिता मलिक की तोशाम में बढ़ती सक्रियता के बाद से ही राज्यसभा सांसद के बीच की तल्खियां बढ़ गई थीं। इसी के चलते 15 पार्षदों के अविश्वास प्रस्ताव के शपथ पत्र देकर चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। लेकिन बैठक में अनिता मलिक ने फिर से पासा पलट दिया। 22 जिला पार्षदों में से छह पार्षद बैठक में नहीं पहुंचे थे।
नवंबर 2022 में हुआ था जिप का चुनाव, दिसंबर में बनी थी अनिता चेयरपर्सन
भिवानी जिला परिषद का चुनाव 27 नवंबर 2022 को हुआ था। इसमें जिले के 22 वार्डों से चुने हुए पार्षदों में से 19 पार्षदों ने अनिता मलिक के पक्ष में मतदान कर 23 दिसंबर 2022 को चेयरपर्सन चुना था। जिप की तीन से चार बैठकों में वार्डों के लिए ग्रांट का भी वितरण हुआ, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले अनिता ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थामा। इसके बाद से ही जिला परिषद की राजनीति में उथल-पुथल मची थी, लेकिन अनिता मलिक को हटाने के लिए दो तिहाई बहुमत यानि कि 15 पार्षदों के वोट चाहिए थे। लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में केवल 13 वोट ही पड़े।
शांतिपूर्वक चुनाव करवाने के लिए प्रशासन रहा तैनात
मंगलवार दोपहर डीआरडीए हॉल में हुए चुनाव को लेकर प्रशासन मुस्तैद दिखा। किसी भी प्रकार की अनहोनी से निपटने के लिए डीआरडीए हाल के बाहर पुलिस बल तैनात रहा। हाल के अंदर किसी भी बाहरी व्यक्ति एंट्री नहीं होने दी। हाल में केवल प्रशासन व पार्षद ही मौजूद रहे।
भाजपा को राज्यसभा सदस्य और मंत्री से इस्तीफा ले लेना चाहिए : अनिता मलिक
अनिता मलिक ने कहा कि राज्यसभा सदस्य और मंत्री उन्हें हटाना चाहते थे, उनकी नहीं चली। इसलिए भाजपा को राज्यसभा सदस्य और मंत्री से इस्तीफा ले लेना चाहिए। तोशाम हलके में सबसे ज्यादा मेरे कार्यक्रम हुए हैं। अपनों का प्यार क्या होता है, हलके के अंदर पता चलता है। सोच अच्छी है भगवान भी अच्छा करता है। काम करने की हमारी अच्छी सोच है। पहले भी जिले में काम किया है और आगे भी काम करेंगे। पार्षद और कांग्रेस पार्टी हमारे साथ हैं। -अनिता मलिक, चेयरपर्सन, जिला परिषद भिवानी।
पार्षदों के अनुरोध पर अविश्वास प्रस्ताव बैठक बुलाई गई थी। बैठक में 16 वार्ड पार्षद मौजूद रहे। मतदान कराया गया और गणना के बाद 13 मत अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में डाले गए और तीन मत विपक्ष में डाले गए। अविश्वास प्रस्ताव पास होने के लिए 15 वोट चाहिए थे। लेकिन 13 ही मिले। इस तरह से अविश्वास प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। -महावीर कौशिक, उपायुक्त, भिवानी।