देश के बंटवारे के दौर से बुनाई के पेशे से जुड़ा लाजवंती का परिवार आज भी अपने पारंपरिक हुनर को सहेजे हुए है। पाकिस्तान में रह रहे उनके परिजन अब भी इसी कारीगरी से जुड़े हैं, जबकि लाजवंती भारत में अपने हुनर के ज़रिए भारतीय बुनाई की गरिमा को आगे बढ़ा रही हैं। जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में चल रही प्रदर्शनी में उनके स्टॉल पर हस्त बुनाई की बारीकियों से सजे जैकेट, सूट और स्कार्फ लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उनके बनाए हर परिधान में परंपरा, मेहनत और कलात्मकता की झलक देखने को मिलती है। अपनी उत्कृष्ट कारीगरी और हस्तशिल्प संरक्षण में योगदान के लिए लाजवंती को पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।