कोंडागांव। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत कार्यरत रसोइयों ने अपने मानदेय में वृद्धि को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद की है। कोंडागांव रसोईया संघ द्वारा केंद्र व राज्य सरकार के साथ-साथ जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप वेतन लागू करने की मांग की गई है।
रसोइयों का कहना है कि वे वर्षों से स्कूलों में लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वर्तमान में उन्हें मात्र ₹2000 प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है, जो उनके श्रम और कार्य के अनुपात में बेहद कम है। उन्होंने बताया कि रोज सुबह 9 बजे से लेकर लगभग 8 घंटे तक वे भोजन बनाने, बच्चों को परोसने और साफ-सफाई जैसे कार्यों में लगे रहते हैं, जिससे अन्य कोई रोजगार करना संभव नहीं हो पाता।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ ने रिट याचिका क्रमांक डब्ल्यू.पी.एस. 8924/2023 में 15 जनवरी 2026 को आदेश पारित करते हुए ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत को लागू किया है। इसके तहत श्रमायुक्त द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी ₹306.67 प्रतिदिन यानी लगभग ₹9200 प्रतिमाह देने का निर्देश दिया गया है।
संघ का कहना है कि यह लाभ केवल याचिकाकर्ता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रदेश के सभी रसोइयों को समान रूप से मिलना चाहिए। रसोइयों ने मांग की है कि शासन तत्काल प्रभाव से इस आदेश को लागू कर सभी को सम्मानजनक वेतन प्रदान करे।
जिलाध्यक्ष सगराम मरकाम ने बताया कि रसोइये लंबे समय से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। हाल ही में 60 दिनों तक चली हड़ताल के बावजूद बजट में कोई राहत नहीं दी गई, जिससे रसोइयों में नाराजगी है। हालांकि, संघ ने 2 मार्च से हड़ताल समाप्त कर काम पर वापसी कर ली है, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तीन माह के भीतर मांग पूरी नहीं होती है, तो रसोइये सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष करने को मजबूर होंगे।