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'पुलिस की कहानी झूठी है': कांग्रेस जांच समिति पहुंची नलाझर, जानें कोहकामेटा फर्जी नक्सली मुठभेड़ पर क्या कहा

अनुज कुमार Updated Tue, 19 Aug 2025 08:25 PM IST

कोंडागांव जिले के कोहकामेटा में कथित नक्सली मुठभेड़ की जांच के लिए कांग्रेस की 7 सदस्यीय समिति नलाझर पहुंची। मोहन मरकाम और लखेश्वर बघेल ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। कोंडागांव जिले के कोहकामेटा नालाझर में हाल ही में एक आदिवासी युवक अभय नेताम को पुलिस ने गोली मारी थी। घटना को पुलिस ने नक्सली मुठभेड़ करार दिया, लेकिन कांग्रेस ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 7 सदस्यीय जांच समिति बनाई। समिति का संयोजक पूर्व मंत्री मोहन मरकाम को बनाया गया, जबकि इसमें बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल, भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी, पूर्व विधायक संतराम नेताम, पीसीसी महामंत्री रवि घोष, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष देवचंद मतलाम और कोंडागांव जिलाध्यक्ष बुधराम नेताम शामिल हैं। बरसात के बावजूद मंगलवार को जांच समिति नलाझर गांव पहुंची। यहां समिति ने अभय नेताम के परिवारजनों और साथियों से मुलाकात की। घायल युवक के साथियों जगन ध्रुव, अमन नेताम और अजय नेताम ने बताया कि वे सभी चिड़िया मारने जंगल गए थे, तभी पुलिस ने उन्हें नक्सली कहकर रोक लिया। अभय नेताम ने पुलिस से कहा कि वह नक्सली नहीं है, लेकिन तभी गोली चला दी गई। ग्रामीणों ने कहा कि नालाझर में कभी नक्सली गतिविधि नहीं हुई। अभय के पिता ने आरोप लगाया कि पुलिस लगातार दबाव बना रही है और बयान बदलने के लिए मजबूर कर रही है। पीड़ित युवकों ने बताया कि पुलिस ने उनसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर भी कराए हैं। मोहन मरकाम ने कहा कि एक तरफ सरकार कहती है कि बस्तर नक्सलमुक्त है, वहीं पुलिस मुठभेड़ की कहानी गढ़ रही है। केंद्र और राज्य सरकार बताएं कि सही कौन है?, लखेश्वर बघेल ने कहा कि यह सरकार की सोची-समझी साजिश है, ताकि आदिवासियों को खत्म किया जा सके। फर्जी मुठभेड़ की आवाज विधानसभा में गूंजेगी। वहीं सावित्री मंडावी ने कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे हैं। यह शर्मनाक है। संतराम नेताम ने कहा कि 15 साल से इस इलाके में आ रहा हूं, यहां कभी नक्सली घटना नहीं हुई। यह मुठभेड़ पूरी तरह से फर्जी है। कांग्रेस ने मांग की है कि अभय नेताम को बेहतर इलाज मिले। परिजन को एक करोड़ रुपए मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज की जाए। मुठभेड़ का फर्जी दावा करने वाले अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो। कांग्रेस जांच समिति ने कहा कि यह मामला केवल अभय नेताम का नहीं है, बल्कि पूरे बस्तर के आदिवासियों के अधिकार और न्याय की लड़ाई है। समिति ने अपनी रिपोर्ट पीसीसी को सौंपने और सड़कों से लेकर विधानसभा तक लड़ाई लड़ने का एलान किया है।

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