पेंड्रारोड-गेवरा रोड रेल लाइन निर्माण के दौरान निकाले गए पत्थरों और बोल्डरों के अवैध उपयोग के मामले में अब जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। रेलवे ठेकेदार द्वारा रेल लाइन निर्माण कार्य के दौरान भारी मात्रा में पत्थर एवं बोल्डर निजी जमीनों पर डंप कर दिए गए थे। इसके बाद निजी जमीन मालिक इन बोल्डरों को तोड़कर हैंड ब्रोकन गिट्टी बनाकर पिछले लगभग पांच वर्षों से खुलेआम बेच रहे थे।
जानकारी के अनुसार प्रतिदिन दो दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली इन पत्थरों का परिवहन कर रही थीं। बिना वैध अनुमति और रॉयल्टी के हो रहे इस कारोबार से शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ। अब खनिज विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
जिला खनिज विभाग द्वारा रेलवे ठेका कंपनी को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अब इन बोल्डरों एवं चट्टानों का परिवहन केवल कलेक्टर की अनुमति के आधार पर ही किया जाएगा। प्रशासन का अनुमान है कि इस कार्रवाई से लगभग 2 करोड़ रुपए के राजस्व की वसूली होगी।
वहीं विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि पूर्व में ही इस पर प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो शासन को करीब 60 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त हो सकता था। मामले को लेकर तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों एवं खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल नव पदस्थ अधिकारियों ने अवैध खनिज परिवहन पर नियंत्रण और राजस्व बढ़ाने की दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया है। जिला खनिज अधिकारी आदित्य मनकर ने बताया कि आगे से पत्थरों का परिवहन और उपयोग पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, जिससे शासन को बड़ी राजस्व राशि प्राप्त होगी।