सावन का आज अंतिम सोमवार है और आज बालोद जिले के शिव मंदिर में लोगों की भीड़ देखने को मिली दरअसल बालोद जिले के ताँदुला नदी से सैकड़ो की संख्या में पवित्र जल उठाकर लोग भोला पठार पहुंचे जहां पर विभिन्न आयोजन किए गए वहीं विधि वर्क पूजा अनुष्ठान का आयोजन भी किया गया था शिव भक्तों ने बताया कि भगवान शिव का चमत्कारिक कथा यहां से जुड़ा हुआ है और यहां आने से उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है यहां पर बालोद के अलावा आसपास के जिलों से भी लोग श्रवण के अंतिम सोमवार को कावड़ यात्रा में शामिल होने पहुंचते हैं। जिस भोला पठार में आज सावन की अंतिम सोमवार को भक्तों की भीड़ लगी हुई है उसके बारे में कहा जाता है कि जहां माता पार्वती ने भगवान राम की परीक्षा लेने की ठानी और सीता का रूप धारण कर राम भगवान के सामने प्रकट हो गई. इस बात से नाराज होकर भगवान भोलेनाथ यही धूनी रमा के बैठ गए और इसका नाम भोला पठार पड़ गया. यहीं से कुछ ही दूर पर सिया देवी मंदिर भी है क्योंकि माता पार्वती ने सीता का रूप धारण कर राम की परीक्षा ली थी । आसपास से आए भक्तों ने बताया कि आज सावन का अंतिम सोमवार है मंदिर द्वारा विभिन्न आयोजन किया जा रहे हैं यहां आने से हमारी मनोकामना पूर्ण होती है यह सिद्ध मंदिर है भगवान भोलेनाथ की अर्धांगिनी माता सती ने यहां पर वनवास काल के दौरान माता-पिता को खोजने आए प्रभु श्री राम की परीक्षा ली थी यहां पर भगवान भोले भी अवतरित हुए थे और कहा जाता है कि जब कुछ समय के लिए भगवान शिव अज्ञातवास में गए थे तो उन्होंने भी इसी जगह पर समय व्यतीत किया था।