जब बारिश ने जीवन को तरोताजा कर दिया, उसी बीच यहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों ने अपनी हिम्मत और उम्मीद का परिचय देते हुए एक अनोखा प्रदर्शन किया। बालोद शहर के नया बस स्टैंड से लेकर मां गंगा मैया शक्तिपीठ तक पांच किलोमीटर की मनोकामना यात्रा निकाली गई, जिसमें हाथों में चुनरियां और आरती की थालियां लिए कर्मी जुटे। भीगती बूंदों के बीच अपने कदमों को ठहराने की जगह तेज करते हुए, वह अपनी मांगों को लेकर माता रानी के दरबार में पहुंचे। एनएचएम कर्मचारियों ने बताया कि वे अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। सरकार की सुनवाई न होने पर उन्होंने अब अपनी बातें सीधे मां गंगा के चरणों में रखने का फैसला किया। चुनरिया और भजनों के बीच यह यात्रा सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनकी उम्मीदों और संघर्षों का प्रतीक थी। मां गंगा मंदिर पहुंचकर कर्मचारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना की और चुनरी अर्पित कर अपनी मनोकामना माता रानी से की। संघ के जिला अध्यक्ष खिलेश कुमार साहू ने बताया कि उनकी मांगें अब तक अनसुनी हैं, इसलिए वे माता की शरण में आकर सरकार को सद्बुद्धि देने प्रार्थना कर रहे हैं। कर्मचारी डाली शिवांगी साहू ने कहा, "हम भी नियमित कर्मचारियों की तरह मेहनत करते हैं, पर ना सम्मान मिला है, ना समय पर वेतन। आज हम यहां अपनी आवाज़ उठाने आए हैं। कर्मचारी संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक दस सूत्रीय मांगों पर लिखित आदेश नहीं मिलते, उनका आंदोलन जारी रहेगा। यह मनोकामना यात्रा इस बात का प्रतीक है कि संघर्ष संघर्ष के बिना अधूरा है और उम्मीदों का दस्ता कभी खत्म नहीं होता। बालोद की भीगती सड़कें आज गूंज उठीं कर्मचारियों के भजनों और अर्चनाओं से, जो सरकार को उनकी पीड़ा तक पहुंचाने का एक अनोखा तरीका था। इस मनोकामना यात्रा ने साबित कर दिया कि वे केवल अपने अधिकारों की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने सम्मान और न्याय की उम्मीद लेकर चल रहे हैं।