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Guru Pradosh Vrat 2023: जून माह का पहला गुरु प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Thu, 01 Jun 2023 10:59 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Guru Pradosh Vrat 2023: कब है जून का पहला गुरु प्रदोष व्रत? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि - फोटो : iStock
Guru Pradosh Vrat 2023: हिंदी पंचांग के अनुसार हर माह में दो बार त्रयोदशी तिथि पड़ती है। प्रत्येक माह की दोनों त्रयोदशी तिथि शिव जी को समर्पित है। इस दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है और भगवान शिव शंकर की पूजा की जाती है। इस बार शिव जी की कृपा पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रदोष व्रत 01 जून दिन गुरुवार को रखा जा रहा है। गुरुवार होने की वजह से इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव शंकर और माता पार्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से शिव जी के साथ माता पार्वती की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही व्यक्ति के जीवन में खुशियां आती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व...

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Guru Pradosh Vrat 2023: कब है जून का पहला गुरु प्रदोष व्रत? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि - फोटो : iStock
गुरु प्रदोष व्रत 2023 तिथि
पंचांग के अनुसार इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 1 जून गुरुवार को दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से हो रही है। यह तिथि अगले दिन 2 जून शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक मान्य रहेगी। प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय की जाती है इसलिए इस माह का पहला प्रदोष व्रत 1 जून को रखा जाएगा। 

 
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Guru Pradosh Vrat 2023: कब है जून का पहला गुरु प्रदोष व्रत? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि - फोटो : iStock
गुरु प्रदोष व्रत 2023 पूजा मुहूर्त
1 जून को गुरु प्रदोष व्रत की शिव पूजा का मुहूर्त शाम को 07 बजकर 14 मिनट से रात 09 बजकर 16 मिनट तक है। इस दिन शिव पूजा के समय अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त भी है, जो कि शाम 07 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर रात 08 बजकर 30 मिनट रहेगा। उसके बाद चर-सामान्य मुहूर्त है, जो रात 08 बजकर 30 मिनट से रात 09 बजकर 47 मिनट तक है। 

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Guru Pradosh Vrat 2023: कब है जून का पहला गुरु प्रदोष व्रत? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि - फोटो : iStock
गुरु प्रदोष व्रत एवं पूजा विधि
  • गुरु प्रदोष व्रत वाले दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहन लें। इसके बाद शिव जी को याद करके व्रत एवं पूजा का संकल्प करें। 
  • फिर शाम के शुभ मुहूर्त में किसी शिव मंदिर जाकर या घर पर ही भगवान भोलेनाथ की विधिपूर्वक पूजा करें। 
  • पूजा के दौरान शिवलिंग को गंगाजल और गाय के दूध से स्नान कराएं। उसके बाद सफेद चंदन का लेप जरूर लगाएं। 
  • भगवान भोलेनाथ को अक्षत, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी का पत्ता, सफेद फूल, शहद, भस्म, शक्कर आदि अर्पित करें। 
  • इस दौरान ''ओम नमः शिवाय'' मंत्र का उच्चारण करते रहें। इस दिन पश्चात शिव चालीसा, गुरु प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। 
  • फिर घी का दीपक जलाएं और शिव जी की आरती करें। 
  • इसके बाद पूजा का समापन क्षमा प्रार्थना से करते हुए शिवजी के सामने अपनी मनोकामना व्यक्त कर दें। 
  • इसके अगले दिन सुबह स्नान आदि के बाद फिर से शिव जी की पूजा करें। फिर सूर्योदय के बाद पारण करें। 
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Guru Pradosh Vrat 2023: कब है जून का पहला गुरु प्रदोष व्रत? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि - फोटो : iStock
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत रखने से भगवान भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होते हैं। इस दिन शिव जी के भक्त व्रत रखते हैं और प्रदोष काल में शिव जी के साथ माता पार्वती की पूजा करते हैं। गुरु प्रदोष व्रत को रखने से शत्रुओं पर विजय, धन, संपत्ति, संतान, सुख आदि की प्राप्ति होती है। दुख मिटते हैं, रोग और ग्रह दोष भी दूर होते हैं। 
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