माओवाद एक विचारधारा है। हम आज भी इसके समर्थक हैं। ये विचार हमें दूसरों के लिए और अन्याय के खिलाफ लड़ने की ऊर्जा देते हैं।
यह बात राष्ट्रदोह के आरोप से बरी हुए जीवन चंद्र आर्य जेसी और गोपाल दत्त भट्ट ने कही। वहीं, सीआरपीपी के संयोजक पान सिंह बोरा ने कहा कि महेंद्र कर्मा को सजा देने का काम सरकार का था।
उसने आदिवासियों पर कई प्रकार से अन्याय किए। जो काम सरकार ने नहीं किया वह नक्सलियों ने कर दिया।
बुधवार को राजनीतिक बंदी रिहाई कमेटी (सीआरपीपी) और क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा (आरडीएफ) के संयुक्त तत्वावधान में हुई पत्रकार वार्ता में जेसी ने कहा कि जल, जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई में वह और उनके साथी जेल गए थे।
इस लड़ाई को कमजोर करने के लिए ही उन्हें फंसाया गया। आरोप गलत थे इस बात पर मंगलवार को रुद्रपुर के अपर एवं सत्र जिला न्यायाधीश की अदालत ने भी मोहर लगा दी।
जेसी ने कहा कि अदालत के फैसले से साफ हो गया है कि अपनी नीतियां जबरन थोपने वाली सरकार को जनता की असहमति की चिंता नहीं है।
वह हर तरह के विरोध को माओवाद का नाम देकर दमन कर देना चाहती है। असहमति के कारण ही 2005 में उन्हें और उनके साथी अनिल चौड़ाकोटी, नीलू बल्लभ, गोपालदत्त भट्ट और राजेंद्र फुलारा को जेल में डाला गया जबकि इन युवाओं का कभी किसी तरह की हिंसा से कोई नाता नहीं रहा।
अनिल और गोपाल की छात्र हितों के लिए लड़ाई और नीलूबल्लभ के मजदूरों हितों के लिए किए संघर्ष को सत्ता ने माओवाद का नाम दिया। इस मौके पर प्रभात उप्रेती, टीआर पांडे, चंद्रशेखर करगेती, जयप्रकाश पांडे, पूजा आदि मौजूद थे।