पुरोला। मोरी सतलुज जल विद्युत परियोजना से जुड़ी लंबित मांगों को लेकर नैटवाड़ बैराज स्थल पर ग्रामीणों का धरना आठवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन के बीच मंगलवार को महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही। महिलाओं ने बैराज स्थल पर पहुंचकर धरने की कमान संभाली और परियोजना प्रबंधन व प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जताया।
आंदोलन का मुख्य मुद्दा बैराज निर्माण के लिए अधिग्रहित कृषि भूमि का लंबित मुआवजा है। ग्रामीणों के अनुसार परियोजना निर्माण के दौरान नैटवाड़ के किसानों की करीब 27 हेक्टेयर कृषि भूमि अधिग्रहित की गई थी, लेकिन वर्षों बाद भी प्रभावितों को भूमि का पूरा मुआवजा नहीं मिल पाया है। इसके अलावा टौंस नदी के पार स्थित कृषि भूमि तक पहुंच के लिए पुल निर्माण, खेती की सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक कार्य और चरान-चुगान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने की मांग भी लंबित है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि लंबित मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरने में वैजयंती नाथ, काशीनाथ, शिशुनाथ, जलमा देवी, कुषादेवी, देवेंद्र देवी, सोनी देवी, विनोद नाथ, सचिन, विजयपाल आदि शामिल रहे। संवाद