आपदा के बाद धंस रहे तहसील मुख्यालय भटवाड़ी को बचाने के लिए भागीरथी के किनारे आरसीसी युक्त प्लम कंक्रीट वॉल के बजाय सामान्य रिटेनिंग वॉल और वायरक्रेट लगाने वाले डिजाइन तथा गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। एक ही बरसात के बाद सुरक्षा दीवारों के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ढंकने के लिए अब जैकेटिंग का काम किया जा रहा है।
वर्ष 2010 की आपदा में 375 परिवारों के अलावा तहसील व ब्लाक मुख्यालय सहित बहुमंजिले होटल, दुकानों वाले कस्बे में भूधंसाव ने कहर बरपाया था। गंगोत्री हाईवे का बड़ा हिस्सा तहसील भवन सहित एक सौ से अधिक दुकानों और घरों को जमींदोज कर दिया था।
पूरे कस्बे में घरों व बरसाती पानी की समुचित निकासी नहीं होने तथा भागीरथी से तेज कटाव के कारण मलबे पर बसी इस बस्ती को बचाने के लिए भू-वैैैज्ञानिकों ने मजबूत सुरक्षा दीवाल से कटाव रोकने की बात कही थी।
निर्माण कार्य की स्थिति यह है कि तेज ढाल वाली भागीरथी के बहाव से किनारों के कटाव रोकने के लिए पहले लगाए सीसी ब्लाक बर्बाद हो गए। रिटेनिंग वॉल के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। ज्यादा क्षतिग्रस्त 150 मीटर हिस्से में क्षतिग्रस्त रिटेनिंग वॉल को बांधने के लिए 1.80 मीटर ऊंची और 60 मीटर चगौड़ी जैकेटिंग पट्टी से बांधा जा रहा है।
निम्न गुणवत्ता तथा आधे-अधूरे सुरक्षा कार्य का ही नतीजा है कि गब्बर कालोनी के ऊपर मुख्य बाजार, बलदेव मार्केट, तहसील क्षेत्र, चढ़ेती बाजार सहित गांव में भी मकानों पर पड़ी दरारें गहराने लगी हैं।
विभाग की ओर भटवाड़ी सुरक्षा के लिए जो डिजाइन मिला था, उसी के अनुरूप काम कराया गया है। 5.15 करोड़ की इस योजना की बचत राशि से जैकेटिंग का काम कराया जा रहा है। -पीएस पंवार, ईई, सिंचाई विभाग उत्तरकाशी।