योजना का नाम-बौंगाड़ी पेयजल योजना, काम शुरू हुआ-2010 में, स्रोत-कामर गाड, योजना की लंबाई-22 किमी, लाभान्वित होने वाले गांव-मुस्टिकसौड़, बौंगाड़ी, कंकराड़ी एवं थलन, लागत 3.10 करोड़, खर्च हुए 2.41 करोड़, वर्तमान स्थिति-अभी तक एक बूंद पानी भी गांव नहीं पहुंचा और आगे भी पहुंचने की उम्मीद नहीं, कारण-दैवी आपदा में क्षतिग्रस्त हो गई थी, अब-गांवों के लिए भागीरथी नदी से फिर करोड़ों रुपये लागत से पंपिंग योजना बनाने की तैयारी।
पेयजल समस्या से जूझ रहे मुस्टिकसौड़, बौंगाड़ी, कंकराड़ी और थलन गांव के लोगों को योजना से बड़ी उम्मीद थी, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद कार्यदायी संस्था पेयजल निगम की ओर से हाथ खड़े किए जाने से ग्रामीणों की उम्मीदें धराशायी हो गई हैं।
ग्रामीण पानी के इंतजार में हैं और विभाग फिर नए सिरे से भागीरथी नदी से पंपिंग योजना निर्माण की तैयारी में जुट गया है।
गांवों के आसपास मौजूद जलस्रोतों को टेप करने के बजाय 22 किमी दूर से कामर गाड से पेयजल लाइन बिछाना, अधबनी योजना के आपदा में क्षतिग्रस्त स्रोत पर आपदा मद से 31 लाख रुपये खर्च किया जाना और अब योजना को चालू करने के बजाय फिर करोड़ों रुपये लागत से नई योजना के निर्माण की तैयारी लोगों के गले नहीं उतर रही है।
बौंगाड़ी पेयजल योजना में कामरगाड स्रोत का चयन वर्षों पूर्व हुआ था। लगातार दो साल यहां बादल फटने से स्रोत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इसकी मरम्मत पर आपदा मद से 31 लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन यह फिर क्षतिग्रस्त हो गया। बजट खर्च करने से बेहतर है कि नई पेयजल योजना का निर्माण कराया जाए। भागीरथी से पंपिंग योजना तैयार कर पहले से बिछी हुई लाइन को उपयोग में लाया जाएगा।
एसपी गुप्ता, ईई, पेयजल निगम उत्तरकाशी।