प्रतिनिधिमंडल ने पुनर्वास निदेशक को बताई समस्या
चिन्यालीसौड़। क्षेत्र में सक्रिय भूस्खलन के चलते लगातार पत्थर-मलबा गिरने से ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। गमरी, दिचली, नेरी और तुल्याड़ा गांवों के ग्रामीणों के साथ छात्र-छात्राओं का नियमित आवागमन इसी मार्ग से होता है। ऐसे में मार्ग पर लगातार हो रहा भूस्खलन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
समस्या को लेकर कनिष्ठ उप प्रमुख भानुप्रिया थपलियाल के नेतृत्व में ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने पुनर्वास निदेशक एवं टिहरी जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने डीएम को मार्ग पर हो रहे भूस्खलन से उत्पन्न खतरे और ग्रामीणों को आवाजाही में आ रही दिक्कतों से अवगत कराया।
वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने टीएचडीसी को चिन्यालीसौड़ क्षेत्र में सक्रिय भूस्खलन का भू-वैज्ञानिक सर्वे कराने के निर्देश दिए। सर्वे के माध्यम से भूस्खलन के कारणों, संवेदनशील स्थानों और संभावित खतरे का आकलन किया जाएगा। इसके बाद प्रभावित क्षेत्र में आवश्यक सुरक्षात्मक एवं स्थायी उपाय तय किए जाएंगे।
टिहरी बांध की झील का जलस्तर बढ़ने से तुल्याड़ा क्षेत्र में आवागमन प्रभावित होने की समस्या भी प्रतिनिधिमंडल ने उठाई। ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की सुविधा को देखते हुए डीएम ने पुनर्वास अधिकारी को क्षेत्र में मोटर बोट की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इस मौके पर पूर्व प्रधान मल्ली खुशपाल चंद रमोला, सामाजिक कार्यकर्ता हरीश थपलियाल, दीपक बिष्ट आदि मौजूद रहे।