फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तर प्रदेश के नियम ने बचाई प्रधानी

विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की जांच नियमावली जनपद की एक महिला प्रधान के लिए वरदान साबित हुई। चुनाव के बाद तीसरी संतान होने के बावजूद प्रधान की प्रधानी बची हुई है जबकि जिला पंचायत राज अधिकारी ने मामले की जांच के बाद प्रधान को पद मुक्त किए जाने की संस्तुति दी थी। शिकायतकर्ता ने शपथपत्र नहीं लगाया तो अधिनियम के तहत शिकायत मान्य नहीं मानी गई।
विज्ञापन

बीते वर्ष 13 सितंबर को कुथनौर ग्राम पंचायत की प्रधान बबली देवी के खिलाफ गांव के ही अभिमन्यु सिंह ने सीएम हेल्प लाइन पर शिकायत की थी जिसमें अभिमन्यु ने लिखा था कि महिला ग्राम प्रधान को पद की जिम्मेदारी लेने के बाद तीसरी संतान हुई है। शिकायतकर्ता ने महिला ग्राम प्रधान की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। शासन के निर्देश पर एसडीएम बड़कोट ने भी मामले की जांच की थी जिसमें चुनाव के बाद तीसरी संतान होने की पुष्टि हुई थी। स्वयं महिला ग्राम प्रधान ने पंचायती राज विभाग को दिए जवाब में चुनाव के बाद तीसरी संतान होने की बात स्वीकारी थी।
इन सभी पहलुओं को देखते हुए पंचायती राज अधिकारी ने बीते छह अगस्त को उक्त महिला प्रधान को पद से हटाए जाने की संस्तुति प्रशासन को दी थी। जब प्रधान को सीडीओ कार्यालय में अपील के लिए बुलाया गया तो प्रधान अपने वकील के साथ यहां पहुंची। वकील ने प्रशासन के समक्ष उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1947 की जांच नियमावली का हवाला दिया। जांच नियमावली के अनुसार शिकायतकर्ता को शिकायत पत्र के साथ एक शपथ पत्र भी देना होता है जो नहीं दिया गया था। इससे शिकायत मान्य नहीं हो सकती। सीडीओ गौरव कुमार ने बताया कि उक्त नियमावली के आधार पर जिला पंचायत राज अधिकारी की संस्तुति को निरस्त कर दिया गया है।
विज्ञापन

उत्तराखंड की नहीं है अपनी नियमावली
उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम से लिया गया है। इसमें कुछ संशोधन किया गया है लेकिन अभी तक उत्तराखंड की अपनी जांच नियमावली नहीं है। ऐसे प्रकरण आने पर उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1947 की जांच नियमावली के आधार पर कार्रवाई की जाती है। उत्तर प्रदेश जांच नियमावली 1997 में बनाई गई है।
टिहरी में भी आया था ऐसा मामला
टिहरी जनपद में भी जिला प्रशासन के समक्ष ऐसा ही मामला आया था जिस पर कार्रवाई करते हुए प्रधान को पद से हटाया गया था। जिला प्रशासन के निर्णय के खिलाफ प्रधान हाईकोर्ट की शरण में गया था। जहां से प्रधान को स्टे मिल गया था जिससे वहां भी प्रधानी बच गई थी।
- जांच नियमावली के आधार पर प्रधान को पद मुक्त किए जाने की डीपीआरओ की संस्तुति निरस्त कर दी गई है। शिकायतकर्ता जांच प्रक्रिया का पालन करते हुए पुन: शिकायत करने के लिए स्वतंत्र है। -गौरव कुमार, सीडीओ उत्तरकाशी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें