- लगातार हो रही बारिश से खेतों में भर रहे पानी से फसल हो रही प्रभावित
पुरोला। रवांई घाटी में इस वर्ष मौसम की दोहरी मार ने मटर उत्पादक व किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। पहले सूखे के कारण फसल ठीक से विकसित नहीं हो पाई और अब बिना मौसम हो रही लगातार बारिश ने तैयार खड़ी फसल को भी नुकसान पहुंचाने का काम किया है। इससे किसानों में भारी मायूसी देखने को मिल रही है।
किसानों का कहना है कि जैसे-तैसे उन्होंने फसल को तैयार किया और तुड़ान का कार्य शुरू ही किया था कि अचानक मौसम ने करवट बदल ली। लगातार हो रही बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है जिससे मटर के पौधे पीले पड़ने लगे हैं। कई स्थानों पर फसल सड़ने की कगार पर पहुंच गई है। इससे उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी सीधा असर पड़ रहा है जिससे बाजार में उचित मूल्य मिलने की उम्मीद कम है। स्थानीय किसान जयदेव चमियाल, कैलाश जोशी उनियाल, श्यालिक राम नौटियाल, हकूमत सिंह, नवीन गैरोला आदि ने बताया कि इस बार मटर की फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद थी जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण और अन्य जरूरी खर्च पूरे कर पाते। लेकिन प्राकृतिक आपदा के चलते अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने कहा कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे और नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की। कृषि विभाग के ब्लॉक तकनीकी अधिकारी विकेश तोमर ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने खेतों में उचित जल निकासी के लिए नालियां अवश्य बनाएं, ताकि वर्षा का पानी खेतों में जमा न हो और फसल को नुकसान से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि मौसम साफ होने के बाद किसान मटर की फसल पर जल्द ही फफूंदनाशक का छिड़काव करें।