गंगोत्री हाईवे से लगे मनेरी गांव तथा आसपास की बस्ती की सुरक्षा के प्रति सरकारी विभाग कतई गंभीर नहीं हैं। बस्ती की सुरक्षा के लिए सवा सात करोड़ रुपये लागत से चल रहे बाढ़ सुरक्षा कार्य अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं।
बीती बरसात में भागीरथी नदी में पानी बढ़ने पर यहां बनी आधी-अधूरी सुरक्षा दीवारों के कई हिस्से निम्न गुणवत्ता के चलते ढह गए। आजकल नदी में पानी कम होने पर भी यहां बरसात के समय से रुके सुरक्षा कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।
जून 2013 की बाढ़ में भागीरथी से हुए कटाव से मनेरी और सिलकुरा बस्ती में भारी नुकसान हुआ था। कई भवन धराशायी होने के साथ ही बड़े पैमाने पर खेती की जमीन और राइंका मनेरी का खेल मैदान भी कट कर गंगा में समा गया था।
बस्ती की सुरक्षा के लिए सरकार ने सिंचाई विभाग अवस्थापना खंड को सवा सात करोड़ रुपये लागत से 750 मीटर लंबी सुरक्षा दीवार के निर्माण का जिम्मा सौंपा। ढाई साल बाद आधा काम भी नहीं हो पाया है।
बीते साल यहां बनाई गई सुरक्षा दीवार के कई हिस्से बरसात सीजन में नदी में पानी बढ़ने पर ढह चुके हैं, जिससे कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मनेरी गांव की प्रधान संजीता रावत, महिला मंगल दल अध्यक्ष कुसुमा देवी, कमल देई, पुष्पा देवी, भरोषी रावत, रामभरोषा, गुलाब किरन, चतर सिंह आदि का कहना है विभाग की लेट लतीफी तटवर्ती आबादी के लिए खतरा बनती जा रही है।
कोट...
मनेरी में 715.3 लाख रुपये लागत से सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया जा रहा है। अब तक करीब 40 फीसदी काम हो चुका है। मानसून सीजन में नदी में पानी बढ़ने के कारण काम रुका हुआ था। अब नदी के पानी को दूसरी ओर डायवर्ट कर तेजी से काम कराया जाएगा। ठेकेदार को हर हाल में अप्रैल 2016 तक काम पूरा करने के आदेश दिए गए हैं।
पीके मल्ल, ईई, सिंचाई विभाग अवस्थापना खंड उत्तरकाशी।