यमुनोत्री धाम के मुहाने पर हजारों टन मलबा से बड़ा खतरा
बड़कोट। आस्था के प्रमुख केंद्र यमुनोत्री धाम में सरकार और सिस्टम की लापरवाही अब साफ नजर आने लगी है। यमुना नदी के मुहाने पर जमा हजारों टन मलबा और विशाल बोल्डर पिछले एक साल से जस के तस पड़े हैं, जिससे आगामी बरसात में बड़ी आपदा का खतरा मंडरा रहा है। जुलाई 2024 की आपदा के बाद यह मलबा यहां एकत्रित हुआ था, लेकिन अब तक इसके निस्तारण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
हालात यह हैं कि कई स्थानों पर यमुना नदी बोल्डरों के नीचे से बह रही है और उसका रुख मंदिर परिसर की ओर मुड़ने की आशंका जताई जा रही है। पिछले डेढ़ दशक में आई आपदाओं के चलते करीब 300 मीटर क्षेत्र मलबे से पट चुका है। बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए करीब 18 करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बावजूद जमीन पर काम शुरू नहीं हो पाया, जिससे पुरोहित समाज और यात्रा से जुड़े लोगों में भारी नाराजगी है। पुरोहित समाज के पुरूषोत्तम उनियाल का कहना है कि सिस्टम की उदासीनता धाम की सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि बरसात में यमुनोत्री धाम में यात्रियों की सुरक्षित होने की उम्मीद नहीं की जा सकती। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता संजय राज ने बताया कि कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्य शुरू हो पाएंगे। उनका कहना है कि जल्द होने वाली कैबिनेट बैठक में बाढ़ सुरक्षा कार्यों की मंजूरी मिल सकती है। तब तक खतरे की आशंका बनी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों और देश विदेश के श्रद्धालुओं में चिंता व्याप्त है।