अब बैसाखी के दिन दोबारा श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे
बड़कोट। मां यमुना के शीतकालीन प्रवास खरसाली गांव में स्थित 12 गांव के आराध्य देव समेश्वर महाराज के कपाट विशेष पूजा-अर्चना के साथ चार माह के लिए बंद किए गए। चार माह बाद बैसाखी पर समेश्वर महाराज मंदिर के कपाट पुन: विधिवत श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
बुधवार को खरसाली गांव में सुबह से ही समेश्वर महाराज की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद दोपहर दो बजे कपाट शीतकाल के लिए विधिवत पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए गए हैं। समेश्वर महाराज देवता के पुजारी संतोष उनियाल ने बताया है कि पौष मास की संक्रांति के दिन से समेश्वर महाराज के कपाट बंद की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
इसके बाद दो गते पौष को मंदिर के कपाट बंद किए जाते हैं। कपाट बंद होने से पहले संक्रांति के पर्व पर क्षेत्र के लोग मंदिर में अपने आराध्य देवता के लिए भेंट चढ़ाने लाते हैं। साथ ही क्षेत्र की खुशहाली और सुख-शांति के लिए मनोकामना करते हैं। दो गति पौष को दोपहर के दौरान देवता की विधिवत पूजा-अर्चना की गई और देवता के पश्वा ने इस अवसर पर अवतरित होकर क्षेत्र के खुशहाली और सुख-शांति का लोगों को आशीर्वाद दिया।
समेश्वर महाराज मंदिर के कपाट शीतकाल में चार माह तक के लिए बंद कर दिए गए हैं। शीतकाल के बाद बैसाखी पर समेश्वर महाराज मंदिर के कपाट पुनः खोल दिए जाएंगे। समेश्वर महाराज गीठ पट्टी क्षेत्र के 12 गांव के आराध्य हैं। इस मौके पर समेश्वर मंदिर के अध्यक्ष जयवीर सिंह रावत, सूरत तोमर, पुरुषोत्तम उनियाल, ग्राम प्रधान नीतू उनियाल, विपिन उनियाल, सुनील उनियाल, चैन सिंह, कबूल चंद, चिदानंद उनियाल, गिरीश उनियाल, सुरेश नौटियाल आदि मौजूद रहे।