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जंगल की आग पर काबू पाना होगा चुनौती

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15 फरवरी से शुरू होने जा रहे फायर सीजन को लेकर वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। बारिश व बर्फबारी कम होने से वनाग्नि की घटनाएं बढ़ने की आशंका है, जिसके चलते वनाग्नि की घटनाओं पर काबू पाना विभाग के लिए चुनौती से कम नहीं होगा।
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जिले का 3028 वर्ग किमी क्षेत्र वनाच्छादित है, जिसमें करीब एक तिहाई भू-भाग पर चीड़ का जंगल फैला हुआ है। यही चीड़ का जंगल वनाग्नि की घटनाओं के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। पिछला फायर सीजन कोरोना लॉकडाउन में गुजरा था, जिसमें बारिश सामान्य रही तो वनाग्नि की घटनाएं भी ज्यादा नहीं हुई। वन अधिकारियों की मानें तो लॉकडाउन में लोगों के घरों में कैद रहने से असामाजिक तत्व भी हानि नहीं पहुंचा सके।
जिले में वन विभाग के कुल पांच प्रभाग व दो नेशनल पार्क हैं, जिसमें करीब 100 क्रू स्टेशन हैं। डीएफओ दीपचंद आर्य ने बताया कि वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए 400 से 500 वन कर्मियों को तैनात किया जाएगा। साथ ही वनाग्नि को रोकने के लिए ग्राम प्रहरियों की भी मदद ली जाएगी।
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बारिश व बर्फबारी कम रहने से वनाग्नि की घटनाएं बढ़ने की आशंका है। वनाग्नि को रोकने के लिए कंट्रोल बर्निंग का काम शुरू कर दिया गया है। क्रू स्टेशन भी अपडेट किए जा रहे हैं। 15 फरवरी से मास्टर कंट्रोल रूम भी चौबीसों घंटे काम करना शुरू कर देगा।
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दीपचंद आर्य, डीएफओ उत्तरकाशी।
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