आठ साल बाद भी नहीं हो पाया महाविद्यालय का उच्चीकरण
गरीब परिवारों के विद्याथियों के लिए उच्च शिक्षा ग्रहण करना बना सपना
चिन्यालीसौड़। महाविद्यालय में हर साल सैकड़ों विद्यार्थी दाखिला ले रहे हैं लेकिन स्नातक के बाद उनकी पढ़ाई के लिए स्थानीय स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है। महाविद्यालय के उच्चीकरण की घोषणा हुए आठ साल हो गए हैं लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसका सबसे ज्यादा असर उन गरीब परिवारों के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
वर्ष 2001 में स्थापित महाविद्यालय में वर्ष 2023-24 में 580, 2024-25 में 666 और 2025-26 में करीब 660 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया। इस सत्र में भी अब तक करीब 500 विद्यार्थी प्रवेश ले चुके हैं और प्रवेश प्रक्रिया जारी है। छात्र संख्या बताती है कि क्षेत्र में उच्च शिक्षा की मांग लगातार बनी हुई है लेकिन महाविद्यालय अब भी स्नातक स्तर तक ही सीमित है। स्नातक के बाद विद्यार्थियों को उत्तरकाशी और दूसरे जिलों का रुख करना पड़ता है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ी बाधा बन जाता है। ऐसे में कई विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा स्नातक के साथ ही थम जाती है। महाविद्यालय के उच्चीकरण की मांग को लेकर छात्र कई बार आंदोलन और भूख हड़ताल कर चुके हैं। आश्वासन मिलने पर आंदोलन समाप्त होते रहे लेकिन उच्चीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
17 सितंबर 2018 को देवीसौड़ आर्च ब्रिज के लोकार्पण समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चिन्यालीसौड़ महाविद्यालय में उच्च कक्षाएं शुरू कराने की घोषणा की थी। इसी दौरान अनोल-भड़ेश्वर-गोरण और रौतल-जुड़खिल मोटर मार्ग के निर्माण की घोषणा भी हुई थी। आठ साल बाद भी इन योजनाओं के लंबित रहने से घोषणाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं। तत्कालीन यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत ने कहा कि महाविद्यालय का उच्चीकरण और दोनों मोटर मार्ग उनकी प्राथमिकता में शामिल थे लेकिन बाद में शासन स्तर पर ठोस पहल नहीं हो सकी।