- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत दिया जा रहा प्रशिक्षण
उत्तरकाशी। मोरी विकासखंड के दूरस्थ बालक छात्रावास आराकोट में छात्रों को मिट्टी से बनने वाले सामान के लिए हस्तशिल्प प्रशिक्षण दिया जा रहा है। छात्रावास प्रबंधन से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि इससे छात्रों को अपनी शिक्षा के लिए हस्तशिल्प की बारिकियों को सीखकर उनके स्वरोजगार में भी यह सहायक सिद्ध होगा। साथ ही उनको भविष्य में आजीविका को सशक्त करने के लिए रोजगार मिल पाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत छात्र-छात्राओं को उनके आसपास के परिवेश, परंपरा और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। इसके तहत आराकोट के नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालक छात्रावास में 60 छात्रों को पॉटरी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। छात्रावास के वार्डन व मूर्तिकार राकेश रावत और पॉटरी आर्टिस्ट दुर्गा वर्मा की ओर से छात्रों को मिट्टी के छोटे बड़ी गमले सहित सामान घड़े, कटोरी आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही उन्हें यह भी जानकारी दी जा रही है कि जब पाॅटरी का निर्माण हो जाए। तो उसके बाद उसको कितने तापमान में पकाया जाए और उसकी ग्लेजिंग की बारिकियों से भी रूबरू करवाया जा रहा है। इसके लिए छात्रावास में भट्टी भी तैयार की गई है। राकेश रावत ने बताया कि इसका मुख्य उद्देशय है कि बच्चे हस्तशिल्प की विद्या में पारंगत होकर इसे अपने स्वरोजगार के रूप में अपना सकें। क्योंकि कई बच्चों के परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है। इससे वह अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकते हैं। कहा कि लाल मिट्टी पहाड़ों में आसानी से मिल जाती है। इसलिए इसे रोजगार के रूप में हस्तशिल्प के माध्यम से बढ़ावा दिया जा सकता है।