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सेब के पेड़ों पर कीटनाशकों का छिड़काव अटका

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लॉकडाउन के चलते जनपद में सेब आदि फलों की बागवानी प्रभावित होने लगी है। आजकल फ्लावरिंग सीजन में फल वृक्षों पर जरूरी कीटनाशकों के छिड़काव का समय है। किसानों की मांग पर प्रशासन ने बागवानी वाले क्षेत्रों में कीटनाशक आदि रसायन तो पहुंचा दिए, लेकिन छिड़काव समेत बागवानी के अन्य कार्यों के लिए शहरों में रह रहे किसानों को गांव लौटने की अनुमति नहीं मिल रही है।
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सेब उत्पादन में अग्रणी उपला टकनौर, स्योरी व मोरी आराकोट क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका सेब उत्पादन पर टिकी है। इस बार सर्दियों में भारी बर्फबारी होने से सेब के पेड़ों की न्यूनतम अवशीतन आवश्यकता पूरी होने से किसानों को अच्छी फसल की उम्मीद है। सुक्की के सेब किसान मोहन सिंह राणा, धराली के महेश पंवार, हर्षिल निवासी डा. नागेंद्र रावत ने बताया कि इस दौरान फूलों पर कीट एवं रोग लगने का सबसे ज्यादा खतरा होता है।
सर्दियों में उपला टकनौर क्षेत्र से अधिकांश किसान जिला मुख्यालय के आसपास के इलाकों में पलायन कर जाते हैं। मार्च तक बर्फबारी का दौर जारी रहने के कारण अधिकांश किसान अभी तक गांव नहीं लौटे हैं। इस बीच लॉकडाउन के चलते किसान अपने प्रवास स्थलों पर ही फंस गए हैं। प्रशासन ने किसानों की मांग पर क्षेत्र में उद्यान विभाग के माध्यम से कीटनाशक तो भेज दिए हैं, लेकिन लॉकडाउन के चलते किसान अपने गांवों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि सेब की फसल बर्बाद हुई, तो उनके समक्ष आने वाले एक साल के लिए आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र गांवों में लौटने की अनुमति देने की मांग की है।
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कोट
लॉकडाउन के दौरान कृषि बागवानी कार्य की अनुमति दी गई है, लेकिन लोगों के गांव लौटने से कोरोना संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसे देखते हुए शासन को पत्र लिखकर इस संबंध में दिशा निर्देश मांगे गए हैं। निर्देश मिलते ही उपला टकनौर क्षेत्र के सेब किसानों को गांव वापसी की अनुमति दी जाएगी।
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डा. आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।
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