जिला प्रशासन ने विधानसभा चुनाव में दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने के लिए व्यवस्था का दावा किया था। सुगम में तो प्रशासन चुस्त दिखा, लेकिन दुर्गम में प्रशासनिक अधिकारियों के ढीले रवैये के कारण कई बुजुर्ग स्वयं मतदेय केंद्रों तक पहुंचे।
विधानसभा चुनाव में जिला प्रशासन ने बुजुर्ग और दिव्यांग लोगों को मतदेय स्थल तक पहुंचाने के लिए डंडी-कंडी के साथ कर्मचारियों और स्वयंसेविकों की तैनाती की थी, लेकिन सिर्फ सुगम स्थलों में ही प्रशासनिक अधिकारी चुस्त दिखे।
दुर्गम में कई असमर्थ व बुजुर्ग लोग मतदेय स्थल तक ले जाने की व्यवस्था नहीं होने के कारण वोट नहीं दे पाए। पुरोला विधानसभा के नौगांव ब्लॉक में मंजियाली गांव की 103 वर्षीय रत्ना देवी मतदान स्थल दूर होने से वोट नहीं दे पाई।
बागसु पोलिंग बूथ पर 83 वर्षीय रामचंद्र असवाल, ढुंगी गांव के प्राथमिक विद्यालय बूथ पर 87 वर्षीय प्रेम सिंह परमार को भी बूथ तक लाने वाला कोई कर्मचारी व स्वयंसेवी नहीं मिला। 50 वर्षीय कन्हैया लाल गुर्साइं लकवा से ग्रसित हैं, जिससे वे चल नहीं सकते हैं। वह गांव के किसी व्यक्ति के सहारे मतदान केंद्र तक पहुंचे।
उनके लिए मतदान केंद्र पर व्हीलचेयर की व्यवस्था नहीं थी। हालांकि सुगम में प्रशासनिक अधिकारी चुस्त दिखाई दिए। वे दिव्यांगों को मतदेय स्थल तक वोट देने के लिए लाए। दिव्यांग सोहन लाल को ज्ञानसू से, प्रमोद को तांबाखानी से और सोहन लाल को ज्ञानसू से प्रशासनिक अधिकारी स्वयं राजकीय महाविद्यालय में बनाए गए मतदेय केंद्र तक लाए। इसी प्रकार तिलोथ में दिव्यांग निशांत बहुगुणा को सरस्वती विद्या मंदिर तिलोथ में और दिव्यांग दिनेश चंद को प्राथमिक विद्यालय लदाड़ी में वोट देने लाया गया।