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छह किमी पैदल चलकर पहुंचते हैं गांव

Fri, 25 Mar 2016 09:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
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पैदल चलते ग्रामीण - फोटो : amarujala
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ब्लाक का भौंती गांव जाने के लिए ग्रामीणों को आज भी छह किमी का पैदल रास्ता नापना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत बीमारों और गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ रही है। बिजोरी ग्राम पंचायत के भौंती गांव को वर्ष 2014 में अलग ग्राम पंचायत का दर्जा तो मिला, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की हालत नहीं सुधरी। करीब साढ़े तीन सौ आबादी वाले गांव तक पहुंचने के लिए सड़क से छह किमी की पैदल पगडंडी नापनी पड़ती हैं।
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बीते सालों में रॉबिन सिंह, राधा देवी एवं गर्भवती शालू देवी की अस्पताल लाते समय रास्ते में ही मौत हो गई थी। गांव की सुमित्रा, प्रमिला एवं मंजीता आदि महिलाओं का तो प्रसव आधे रास्ते में ही हो गया था। बीते साल जून में चंद्रमोहन की पत्नी राजुली ने प्रसव के लिए अस्पताल ले जाते समय पैदल रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे दिया था, जिसमें राजुली तो बच गई थी, लेकिन नवजात की मौत हो गई थी।

गांव में टीकाकरण की व्यवस्था नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को बीस किमी दूर नौगांव आना पड़ता है। आठवीं कक्षा से आगे की पढ़ाई के लिए ग्रामीण जंगली जानवरों के भय से बच्चों को जंगल के रास्ते बर्नीगाड भेजने से डरते हैं।
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कुछ ही ग्रामीण बर्नीगाड में कमरे लेकर किसी तरह बच्चों को पढ़ाई करा रहे हैं। गांव का बेसिक स्कूल जर्जर होने से बच्चे खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। गांव में बिजली तो है, लेकिन झूलते तार हादसों को न्योता दे रहे हैं।

गांव तक सड़क नहीं है, इसलिए अधिकारी भी हमारे गांव नहीं आते। आएं तो उन्हें ग्रामीणों की दिक्कतों के बारे में पता चले। गांव में नकदी फसल उत्पादन की संभावनाएं तो हैं, लेकिन ढुलान भाड़े के चलते ग्रामीणों की आर्थिकी नहीं सुधर पा रही। सड़क बनेगी तभी समस्याओं का समाधान होगा।
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दर्शनी देवी, प्रधान भौंती नौगांव।
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