सरकारी अभिलेखों में विद्युतीकृत दिखाए जा रहे सालू गांव में 25 वर्षों से किसी ने गांव में बिजली नहीं देखी। यही नहीं भू-धंसाव की चपेट में आए गांव के कुछ परिवारों को भटवाड़ी व रवैड़ी तोक में विस्थापित किया गया। गांव में 14 साल पहले बिजली के तार तो पहुंचाए गए, लेकिन बल्ब आजतक नहीं जला।
वर्ष 1991 के भूकंप में 66 परिवार वाले भटवाड़ी ब्लाक के सालू गांव की बिजली की लाइन पूरी तरह से ध्वस्त हो गई थी। भूकंप से बिजली ही नहीं, बल्कि गांव की जमीन चटकने से यहां भू-धंसाव तेज हो गया। इसी तरह वर्ष 2002 में 51 परिवारों को रवैड़ी और भटवाड़ी तोक में विस्थापित किया गया।
15 परिवार अभी भी गांव में रहते हैं। प्रधान दिनेश सिंह बताते हैं कि ऊर्जा निगम, डीएम, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों की बैठकों में गुहार लगाने के बावजूद आज तक गांव में बिजली नहीं पहुंची। गांव के लोग भूकंप और आपदा के समय स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से बांटी गई सोलर लालटेन और कई परिवार लालटेन की रोशनी में गुजारा कर रहे हैं।
उनका गांव और विस्थापित बस्ती गंगोत्री हाईवे से मात्र दो किमी दूर और सौरा तक बनी सड़क से तीन सौ मीटर ही दूर पर है, बावजूद इसके गांव के लोग बिजली और सड़क से वंचित हैं। ऊर्जा निगम के एसडीओ आरएल रतूड़ी कहते हैं कि दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में प्रस्ताव आएगा। तभी काम किया जा सकता है। अधूरी बिजली लाइन का उनके पास कोई ब्योरा नहीं है।