कोरोना महामारी के चलते रवाईं घाटी के आराध्य रुद्रेश्वर देवता का मेला इस बार नहीं होगा। हालांकि विधि विधान के साथ रुद्रेश्वर देवता की मूर्ति को पूजा-अर्चना कर देवलसारी गांव स्थित प्राचीन मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया गया। अब एक साल तक श्रद्धालु देवलसारी गांव में ही देवता के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे।
रवाईं घाटी के 65 गांवों में रुद्रेश्वर देवता के प्रति ग्रामीणों की अगाध आस्था है। देवता के क्षेत्र में देवलसारी, कंडाऊं, तीयां और बजलाड़ी गांव में प्राचीन मंदिर स्थित हैं। हर साल देवता की प्राचीन मूर्ति को एक गांव के मंदिर के गर्भगृह से निकालकर दूसरे गांव ले जाया जाता है। इस धार्मिक अनुष्ठान को हर साल भव्य रूप से आयोजित किया जाता है। इस बार कोरोना महामारी के चलते रुद्रेश्वर देवता के मेले का आयोजन नहीं किया गया। इस मौके पर देवलसारी मंदिर समिति के अध्यक्ष जयवीर परमार, कंडाऊं मंदिर समिति के अध्यक्ष फुलक सिंह, तीयां मंदिर समिति के अध्यक्ष दीवान सिंह, बजलाड़ी मंदिर समिति के अध्यक्ष रामकृष्ण थपलियाल, सभासद विजयपाल सिंह आदि मौजूद रहे।