पुरोला। रवांई घाटी में शनिवार से शुरू हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार है वहीं कई किसानों ने देशी धान की कटाई कर फसल को खेतों में सुखाने के लिए रखा हुआ है। ऐसे समय हुई बारिश से खेतों में पड़ी फसल के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
घाटी में इन दिनों किसान धान की कटाई के साथ पशुओं के लिए शीतकालीन चारे की व्यवस्था में भी जुटे हैं। किसानों ने खेतों से घास काटकर सुखाने के लिए रखी थी, लेकिन बारिश के कारण पूरी घास भीग गई। किसानों का कहना है कि अब घास को दोबारा पूरी तरह सुखाने में करीब 15 दिन लग सकते हैं।
लगातार नमी बनी रही तो घास के सड़ने और पशुओं के चारे के रूप में अनुपयोगी होने की आशंका है। किसान ओमप्रकाश गैरोला, नवीन गैरोला, रमेश असवाल, जगमोहन, स्यालिक राम नौटियाल और हकूमत सिंह ने बताया कि बारिश का दौर लंबा खिंचा तो खेतों में कटी धान की फसल को भी भारी नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि सितंबर के अंतिम दिनों में बारिश ने किसानों की तैयारियों को प्रभावित कर दिया है। किसानों के मुताबिक, धान की कटाई और मड़ाई के साथ घास को सुरक्षित रखने के लिए सूखा और खुला मौसम बेहद जरूरी है।