मिट्टी की सेहत सुधारने पर दिया गया जोर
चिन्यालीसौड़। बदलते मौसम की चुनौतियों के बीच पर्वतीय खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ में सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। बृहस्पतिवार से शुरू हुए इस प्रशिक्षण में किसानों को फसल विविधीकरण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। इसी के साथ मिट्टी की उर्वरता बचाने के लिए खेत बचाओ अभियान भी शुरू किया गया है, जो 30 नवंबर तक चलेगा।
कृषि विज्ञान केंद्र में अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण का विषय जलवायु-सहिष्णु पर्वतीय कृषि हेतु एकीकृत कृषि प्रणाली है। इसका उद्देश्य किसानों को बदलती जलवायु के अनुरूप खेती के तरीके अपनाने और कृषि आधारित आजीविका को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षित करना है।
खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता बनाए रखने के उपाय बताए गए। उन्हें मृदा परीक्षण के आधार पर खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करने, जैविक खाद अपनाने तथा फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने की जानकारी दी गई। मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और संतुलित उर्वरक उपयोग पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम का आयोजन केंद्र के अध्यक्ष डॉ. गौरव पपने के निर्देशन में किया जा रहा है। प्रशिक्षण का समन्वयन डॉ. शशिधर बीआर कर रहे हैं। इस अवसर पर डॉ. मनीषा आर्य, आकृति देवी, सचिन सिंह पंवार, ख्याली राम, ज्योति बेरी, आदित्य कुमार आदि मौजूद रहे।