लोगों ने की टैंकों की सफाई और दवाई के उपयोग करने की मांग
बड़कोट। नगर पालिका क्षेत्र में पेयजल योजना पर लाखों खर्च होने के बावजूद दूषित जलापूर्ति से निजात नहीं मिल रही है। इसका प्रतिकूल असर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने समय-समय पर टैंकों की सफाई और दवाई का उपयोग कर स्वच्छ जलापूर्ति करने की मांग की।
नगर पालिका क्षेत्र की पेयजल योजना पर करीब पौने तीन करोड़ की नलकूप पेयजल योजना जोड़ने के बाद इस बार पेयजल किल्लत से कुछ जगहों को छोड़कर निजात तो मिली है लेकिन बारिश के चलते अधिकांश समय मटमैला पानी की सप्लाई लोगों के घरों तक हो रही है। इसके कारण पिछले लंबे समय से पीलिया एवं पेट से संबंधित मरीजों के अस्पताल पहुंचने के मामले आ रहे हैं।
राज्य आंदोलनकारी किताब सिंह रावत, अजय रावत, सोहन गैरोला ने कहा कि इस बार काफी हद तक पेयजल की किल्लत से निजात मिली है लेकिन बारिश के कारण उन्हें दूषित जल पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पेयजल आपूर्ति के टैंक की नियमित सफाई नहीं होने से उन्होंने दूषित पानी पीना पड़ रहा है।
उन्होंने टैंकों की सफाई कर नियमित रूप से दवाई का उपयोग कर शुद्ध जलापूर्ति करने की मांग की जिससे आम लोगों को दूषित जलापूर्ति से निजात मिल सके। सीएचसी बड़कोट के प्रभारी डॉ. अंगद सिंह राणा ने बताया कि कुछ समय से जलजनित रोगों के मरीज बढ़े हैं। इनमें 15 साल से कम उम्र वाले अधिक हैं। वहीं जल संस्थान के ईई देवराज तोमर ने बताया कि नलकूप पेयजल योजना पर सप्लाई के साथ ही पंप हाउस से दवाई आती है। फिर स्रोत वाले टैंक में भी दवाई डाली जाती है।