जनपद में वृद्धाश्रम का भवन बन कर तैयार हो चुका है लेकिन संचालन के लिए प्रशासनिक ढांचा तय नहीं होने से इसका संचालन शुुरू नहीं हो पा रहा है। वहीं समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कार्मिकों की तैनाती के लिए शासन से कई बार पत्राचार किया गया है।
वर्ष 2019 में हाईकोर्ट के निर्णय पर शासन ने सभी जनपदों में वृद्धाश्रम निर्माण के निर्देश दिए थे। वृद्धाश्रम निर्माण के लिए भूमि शहर क्षेत्र व स्वास्थ्य केंद्र के नजदीक चयन किए जाने का विशेष ध्यान रखने के भी निर्देश दिए गए थे जिससे वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को स्वास्थ्य व अन्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो। कई जनपदों में मानकों के अनुरूप भूमि नहीं मिलने के कारण वृद्धाश्रम का निर्माण नहीं हो पाया था। जबकि उत्तरकाशी में भवन निर्माण होने के बाद भी इसका संचालन नहीं हो पा रहा है।
यहां बीते अप्रैल में जिला मुख्यालय से करीब 12 किमी दूर सैंणी (डुंडा) में डेढ़ करोड़ से अधिक लागत से भवन बन कर तैयार हो चुका है। भवन की क्षमता 24 बेड की है। भवन निर्माण पूर्ण होने के छह माह बाद भी इसका संचालन शुरू नहीं हो पाया है। विभाग का कहना है कि वृद्धाश्रम के लिए स्टाफ नहीं है जिससे संचालन संभव नहीं है। स्टाफ की तैनाती के लिए शासन से कई बार पत्राचार किया गया है।
कोट
- वृद्धाश्रम का भवन बन कर तैयार हो चुका है लेकिन स्टाफ नहीं होने से इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। स्टाफ की तैनाती के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। - सुधीर जोशी, जिला समाज कल्याण अधिकारी उत्तरकाशी।