स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों में भिन्नता
जिले के अधिकारी नहीं हैं कुपोषण मुक्त भारत अभियान को लेकर गंभीर
उत्तरकाशी। सीमांत जनपद में कुपोषण का शिकार बच्चों को लेकर स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों में भिन्नता देखने को मिल रही है। इसके साथ ही इस वर्ष जनपद के किसी भी अधिकारी ने किसी कुपोषित बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।
जनपद में जहां महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार 54 बच्चे कुपोषित हैं, वहीं 18 बच्चे अति कुपोषित हैं। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में मात्र 19 बच्चे ही कुपोषण का शिकार हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दोनों विभागों का सर्वे अलग-अलग मानकों के अनुसार किया जाता है। इसलिए यह भिन्नता हो सकती है। वहीं कुपोषित बच्चों को मानकों के अनुरूप सुविधाएं दी जा रही है, लेकिन इस वर्ष किसी भी अधिकारी ने कुपोषण के शिकार बच्चों को गोद नहीं लिया है।
इस प्रक्रिया को महिला एवं बाल विकास की ओर से पूरा करवाया जाता है। यह दर्शाता है कि जिले के अधिकारी कुपोषण मुक्त भारत अभियान को लेकर कितने संजीदा हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी यशोदा बिष्ट ने कहा कि गोद लेने की प्रक्रिया में कुछ देरी हुई थी। इसे मार्च तक पूरा किया जाएगा। वहीं जनपद में इस वर्ष कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या नहीं बढ़ी है।